श्रीकृष्ण जन्माष्टमी हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और उत्साहपूर्ण पर्व है, जिसे भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन श्रीकृष्ण के जन्म की दिव्य कथा, उनकी लीलाएँ और धर्म की स्थापना का संदेश भक्तों को भक्ति, प्रेम और सत्य के मार्ग पर प्रेरित करता है। जन्माष्टमी की कथा (Krishna Janmashtami Katha) भक्तों के हृदय में श्रद्धा का दीप जलाती है।
✨ पृथ्वी पर अधर्म का बढ़ना और विष्णु अवतार का संकल्प
द्वापर युग में धरती पर अधर्म, अत्याचार और अन्याय चरम पर था।
कंस जैसे अत्याचारी राजा जनता पर अत्याचार कर रहे थे। पृथ्वी ने दुख सहन न करते हुए देवताओं के साथ भगवान विष्णु की शरण ली।
पृथ्वी ने प्रार्थना की—
“हे प्रभु, मेरा भार बढ़ गया है, कृपया मुझे अधर्म से मुक्ति दिलाइए।”
भगवान विष्णु ने आश्वासन दिया कि वे अवतार लेकर इस संसार में धर्म की स्थापना करेंगे और अत्याचारियों का विनाश करेंगे। इस प्रकार कृष्ण अवतार का आधार बना।
✨ देवकी-वसुदेव का विवाह और आकाशवाण
मथुरा के राजा कंस की हन देवकी का विवाह वसुदेव जी से हुआ।
विवाह के बाद जैसे ही कंस देवकी को विदा करने चला, अचानक आकाश में दिव्य आवाज गूँजी—
“हे कंस! देवकी का आठवाँ पुत्र तेरा संहार करेगा।”
कंस भयभीत और क्रोधित हो गया। उसने देवकी को मारने की कोशिश की, लेकिन वसुदेव ने उसे समझाते हुए कहा—
“तुम्हें जो संतान होगी, मैं स्वयं सौंप दूँगा।”
कंस ने दोनों को कारागार में कैद कर दिया।
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✨ छः पुत्रों का वध और सातवें गर्भ का रहस्य
देवकी के एक-एक कर छह पुत्र हुए, और कंस ने सभी को मार डाला।
सातवें गर्भ में भगवान की माया आई—
यह गर्भ रोहिणी के पास पहुँच गया और वहाँ बलराम का जन्म हुआ।
चमत्कारिक रूप से देवकी का गर्भ खाली हो गया।
✨ श्रीकृष्ण का जन्म – आधी रात का दिव्य चमत्कार
देवकी के आठवें गर्भ में भगवान विष्णु स्वयं पधारे।
श्रावण कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, आधी रात के समय कारागार में दिव्य प्रकाश फैल गया।
देवकी-वसुदेव ने स्वयं श्रीकृष्ण को दिव्य रूप में देखा।
कृष्ण ने वसुदेव से कहा—
“पिता, मुझे गोकुल ले जाइए। यशोदा माता मेरी लीलाओं की भूमिका हैं।”
और फिर अद्भुत घटनाएँ घटी—
जब कंस ने उस कन्या को मारने की कोशिश की, तो वह देवदूती होकर बोली—
“तेरा विनाशक कहीं और जन्म ले चुका है।
✨ श्रीकृष्ण जन्म का अर्थ और संदेश
श्रीकृष्ण का जन्म केवल एक चमत्कार नहीं था, बल्कि यह था—
- धर्म की स्थापना का वचन
- अधर्म और अत्याचार का अंत
- प्रेम, करुणा और ज्ञान का संदेश
- भक्तों के लिए आशा का प्रकाश
जन्माष्टमी हमें सिखाती है कि जब संसार में अधर्म बढ़ता है,
तो भगवान स्वयं अवतार लेकर धर्म की रक्षा करते हैं।
✨ निष्कर्ष
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की कथा भक्तों को भयमुक्त, प्रेममय और धर्ममय जीवन जीने की प्रेरणा देती है।
भगवान कृष्ण का जन्म तेज, प्रेम, संगीत, आनंद और दिव्यता का प्रतीक है।
इस पावन उत्सव पर हर भक्त यही प्रार्थना करता है—
“हे नंद के लाल, हमारे जीवन में भी प्रकाश और आनंद भर दो।”

