नागपुर:
नागपुर जिले के ग्रामीण और प्राकृतिक पर्यटन को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। बाबुलखेड़ा गांव में लगभग ₹45 करोड़ की लागत से विकसित किया जा रहा ‘ऑक्सीजन हब’ इको-टूरिज्म प्रोजेक्ट क्षेत्र के विकास का नया केंद्र बनने जा रहा है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना फरवरी तक आम नागरिकों और पर्यटकों के लिए खोलने की तैयारी में है। प्रशासन और पर्यटन विभाग के अनुसार, इस प्रोजेक्ट से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
यह ऑक्सीजन हब पंचमुखी हनुमान मंदिर के समीप विकसित किया जा रहा है, जहां पहले से ही श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों की आवाजाही रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस क्षेत्र को इको-टूरिज्म के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है, ताकि धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ प्राकृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सके
ऑक्सीजन हब परियोजना का मुख्य उद्देश्य हरित क्षेत्र का विस्तार करना और लोगों को शुद्ध वातावरण उपलब्ध कराना है। परियोजना के अंतर्गत बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया है, जिससे यह क्षेत्र ‘ग्रीन ज़ोन’ के रूप में विकसित हो सके। यहां आने वाले पर्यटकों को शहरी प्रदूषण से दूर शुद्ध हवा और शांत वातावरण का अनुभव मिलेगा।
परियोजना में प्रकृति के अनुकूल निर्माण पर विशेष ज़ोर दिया गया है। प्लास्टिक-मुक्त परिसर, वर्षा जल संचयन, सौर ऊर्जा का उपयोग और जैव विविधता संरक्षण जैसे पहलुओं को प्राथमिकता दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह प्रोजेक्ट पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास का एक आदर्श मॉडल बनेगा
ऑक्सीजन हब में पर्यटकों के लिए कई आकर्षण विकसित किए जा रहे हैं। इनमें नेचर ट्रेल, वॉकिंग और जॉगिंग ट्रैक, योग और ध्यान केंद्र, बच्चों के लिए ओपन प्ले एरिया, बर्ड वॉचिंग ज़ोन और विश्राम स्थल शामिल हैं। इसके अलावा, प्राकृतिक सौंदर्य को नज़दीक से महसूस करने के लिए लकड़ी के कॉटेज और इको-फ्रेंडली बैठने की व्यवस्थाएँ भी की जा रही हैं।
पर्यटन विभाग के अनुसार, यह स्थान परिवारों, वरिष्ठ नागरिकों, विद्यार्थियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र होगा। यहां शैक्षणिक टूर और पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाने की योजना है।इस इको-टूरिज्म परियोजना से बाबुलखेड़ा और आसपास के गांवों के लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। गाइड, सुरक्षा कर्मी, रखरखाव कर्मचारी, सफाई कर्मी और स्थानीय उत्पादों की बिक्री जैसे क्षेत्रों में अवसर पैदा होंगे। इसके साथ ही, स्थानीय युवाओं को पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी से जुड़े प्रशिक्षण देने की भी योजना है।
अधिकारियों का मानना है कि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और पलायन पर भी अंकुश लगेगा। स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों को भी इस परियोजना से जोड़ने पर विचार किया जा रहा है, ताकि वे हस्तशिल्प, खाद्य उत्पाद और अन्य स्थानीय वस्तुओं की बिक्री कर सकें
नागपुर पहले से ही सेमिनरी हिल्स, अंबाझरी झील और पेंच जैसे पर्यटन स्थलों के लिए जाना जाता है। बाबुलखेड़ा का ऑक्सीजन हब इन स्थलों की सूची में एक नया और अनूठा नाम जोड़ने जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह परियोजना नागपुर को ‘ग्रीन टूरिज्म डेस्टिनेशन’ के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगी।
पर्यटन विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ते प्रदूषण और तनाव भरी जीवनशैली के बीच ऐसे इको-टूरिज्म प्रोजेक्ट्स की मांग लगातार बढ़ रही है। ऑक्सीजन हब लोगों को स्वास्थ्य, प्रकृति और पर्यटन का एक साथ अनुभव प्रदान करेगा।प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और फरवरी तक परियोजना को जनता के लिए खोलने की योजना है। सुरक्षा, पार्किंग और यातायात व्यवस्था को लेकर भी विस्तृत योजना बनाई जा रही है, ताकि पर्यटकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
कुल मिलाकर, बाबुलखेड़ा का ₹45 करोड़ का ऑक्सीजन हब इको-टूरिज्म प्रोजेक्ट न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, बल्कि यह नागपुर और विदर्भ क्षेत्र के पर्यटन और आर्थिक विकास को भी नई दिशा देने वाला साबित होगा।

