नागपुर, ता.०५ सुनील सरोदे मध्यपूर्व में जारी ईरान और इज़राइल के बीच तनाव का असर अब सीधे नागपुर की सड़कों पर दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते एलपीजी आपूर्ति प्रभावित होने का हवाला देते हुए शहर की प्रमुख कंपनियों ने एलपीजी के दाम में प्रति लीटर 8 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। इस दरवृद्धि का सबसे अधिक असर हजारों ऑटो रिक्शा चालकों पर पड़ा है।
नागपुर में बड़ी संख्या में ऑटो रिक्शा, दोपहिया और कुछ चारपहिया वाहन एलपीजी पर चलते हैं। रोज़ की कमाई पर परिवार चलाने वाले चालकों के लिए ईंधन खर्च सबसे अहम होता है। 8 रुपये की बढ़ोतरी से उनकी दैनिक आय का बड़ा हिस्सा ईंधन पर ही खर्च होने लगा है। नतीजतन घर खर्च, बच्चों की पढ़ाई, किस्तें और इलाज जैसे जरूरी खर्च पूरे करना मुश्किल हो गया है।
कोरोना काल में आर्थिक संकट झेल चुके इस वर्ग को कुछ समय के लिए सस्ती एलपीजी से राहत मिली थी, लेकिन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात ने वह राहत भी छीन ली है।
व्यापारियों के अनुसार विदेश से आने वाली एलपीजी शिपमेंट में देरी हो रही है और भंडार सीमित दिनों के लिए ही उपलब्ध है। ऐसे में कमी की आशंका बढ़ गई है। इसी पृष्ठभूमि में कुछ ऑटोचालकों द्वारा घरेलू सिलेंडर को अवैध रूप से वाहनों में भरने की चर्चाएँ सामने आ रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह तरीका बेहद खतरनाक है और बड़े हादसे को निमंत्रण दे सकता है। बिना सुरक्षा मानकों के सिलेंडर से सीधे गैस भरना विस्फोट का जोखिम बढ़ाता है। यदि कोई दुर्घटना होती है तो चालक के साथ आसपास की बस्तियाँ भी खतरे में आ सकती हैं।
घरेलू सिलेंडर का वाहन उपयोग बढ़ने पर आम गृहिणियों को रसोई गैस की उपलब्धता में दिक्कत आ सकती है। आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से कृत्रिम कमी और आगे दरवृद्धि की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस तंत्र के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन गई है। अवैध गैस रिफिलिंग पर सख्त कार्रवाई, जनजागरूकता अभियान और नियमित जांच आवश्यक मानी जा रही है। साथ ही ऑटोचालकों को अस्थायी राहत, अनुदान या दर नियंत्रण जैसे कदमों पर सरकार से नीति निर्णय की मांग भी उठ रही है।
एलपीजी की दरवृद्धि का असर केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा। यदि ऑटो किराए में बढ़ोतरी होती है तो उसका भार आम नागरिकों पर पड़ेगा और महंगाई का दबाव बढ़ेगा। अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक तनाव का स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता प्रभाव अब नागपुर में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो सामाजिक असंतोष बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
युद्ध की स्थिति समाप्त होने तक ईंधन आपूर्ति और मूल्य नियंत्रण के बीच संतुलन बनाए रखना ही प्रशासन और सरकार की असली परीक्षा होगी।

