राज्य में घरेलू गैस सिलेंडर का व्यावसायिक उपयोग और कालाबाजारी रोकने में प्रशासन विफल साबित हो रहा है, ऐसा आरोप ग्राहक दक्षता कल्याण फाऊंडेशन ने लगाया है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग से तत्काल उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर सख्त कार्रवाई करने की मांग फाउंडेशन ने की है।
राज्य के विभिन्न जिलों में घरेलू LPG सिलेंडरों से वाहनों में अवैध रिफिलिंग तथा व्यावसायिक उपयोग बड़े पैमाने पर होने का दावा करते हुए फाउंडेशन ने फोटो और वीडियो सबूत प्रस्तुत करने की बात कही है। इसके बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने पर नाराजगी व्यक्त की गई है।
फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीन सोळंके ने प्रधान सचिव को भेजे पत्र में कोल्हापुर, सोलापुर, सांगली, सातारा, संभाजीनगर, नांदेड़, धुले, नागपुर, अहिल्यानगर और नाशिक सहित कई जिलों में चल रहे अवैध कारोबार का उल्लेख किया है। राज्य के 20 प्रमुख जिलों के 2490 संदिग्ध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सूची देने के बावजूद कार्रवाई का कोई स्पष्ट अहवाल न होने का आरोप उन्होंने लगाया।
पिछले पांच वर्षों में अवैध उपयोग के संबंध में दर्ज 571 एफआईआर की जानकारी को गंभीर बताते हुए इस पर विस्तृत चर्चा की मांग की गई है। बार-बार हो रही गैस सिलेंडर विस्फोट की घटनाओं के बावजूद राज्य, संभाग और जिला स्तर पर सतर्कता दलों द्वारा विशेष अभियान क्यों नहीं चलाए गए, यह सवाल भी उठाया गया है।
इसके अलावा तेल कंपनियों के गोदामों के कंप्यूटरीकरण की स्थिति, उपभोक्ताओं के बायोमेट्रिक ई-केवाईसी की प्रगति तथा गैस वितरण के समय वजन और लीकेज जांच के संबंध में जनजागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
“हमने सबूतों के साथ कई शिकायतें कीं, लेकिन प्रशासन की ओर से ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली। यदि तुरंत बैठक कर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो यह कालाबाजारी आम जनता की जान पर भारी पड़ सकती है,” ऐसा इशारा नितीन सोळंके ने दिया।
इस संबंध में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी।

