नागपुर: महाराष्ट्र के नागपुर जिले के कोदामेंढी गांव में आयोजित एक मुख व दंत रोग जाँच शिविर में सामने आए आंकड़ों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय व अस्पताल (GDCH) द्वारा आयोजित इस शिविर में कुल 310 लोगों की जांच की गई, जिसमें से 30 मरीजों में प्री-ओरल कैंसर के लक्षण पाए गए। ग्रामीण इलाकों में इस तरह की स्थिति सामने आना स्वास्थ्य विभाग के लिए एक गंभीर संकेत माना जा रहा है।
शिविर में 310 मरीजों की जांच
इस विशेष स्वास्थ्य शिविर में कुल 310 मरीजों की जांच की गई। जांच के दौरान डॉक्टरों की टीम ने ग्रामीणों के मुख और दंत स्वास्थ्य की विस्तृत जांच की और उन्हें आवश्यक उपचार व सलाह भी दी।
30 मरीजों में प्री-ओरल कैंसर के लक्षण
जांच के दौरान लगभग 30 मरीजों में प्री-ओरल कैंसर के लक्षण पाए गए, जो कुल जांच का करीब 10 प्रतिशत है। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और समय रहते इलाज नहीं हुआ तो यह आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकती है।
60 मरीजों की स्केलिंग और 33 की डेंटल फिलिंग
शिविर के दौरान कई मरीजों को तुरंत उपचार भी प्रदान किया गया। डॉक्टरों ने 60 मरीजों की दांतों की स्केलिंग की, जबकि 33 मरीजों की डेंटल फिलिंग कर उनका इलाज किया गया।
युवाओं में तंबाकू और ‘खर्रा’ की लत सबसे बड़ी वजह
डॉक्टरों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में तंबाकू और ‘खर्रा’ का अत्यधिक सेवन एक बड़ी समस्या बन चुका है। इसके कारण कई युवाओं में मुँह न खुलने जैसी गंभीर समस्या देखी जा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस का संकेत है, जो आगे चलकर मुँह के कैंसर में बदल सकता है।
25 वर्षीय महिला का गंभीर मामला सामने आया
शिविर के दौरान एक 25 वर्षीय महिला का मामला भी सामने आया, जिसका मुँह ठीक से नहीं खुल रहा था। डॉक्टरों ने जांच में पाया कि वह लंबे समय से तंबाकू सेवन की आदी थी, जिसके कारण यह समस्या उत्पन्न हुई।
समय रहते पहचान और तंबाकू से दूरी जरूरी
GDCH के डॉ. वैभव कारेमोरे ने लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि समय पर बीमारी की पहचान और तंबाकू से दूरी ही इस तरह की गंभीर बीमारी से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने ग्रामीणों से नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और तंबाकू का सेवन तुरंत छोड़ने की अपील भी की।

