एक ओर वैश्विक युद्ध की आशंका के चलते केंद्र सरकार द्वारा व्यावसायिक गैस आपूर्ति पर सीमाएं लगाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर नागपुर के करीब प्राकृतिक गैस (PNG) उपलब्ध होने के बावजूद बुटीबोरी औद्योगिक क्षेत्र के उद्योग गंभीर संकट में फंस गए हैं।
कॉन्ट्रैक्टर कंपनी की धीमी कार्यप्रणाली के कारण पाइपलाइन का काम समय पर पूरा नहीं हो पाया है, जिससे 40 से अधिक मध्यम और बड़े उद्योगों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। गैस की कमी के कारण कई कंपनियों को उत्पादन में भारी कटौती करनी पड़ रही है।
इतना ही नहीं, सामान्य नागपुरवासियों को भी तेज गर्मी में गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है, जिससे नागरिकों में भी नाराज़गी बढ़ती जा रही है।
मुख्य समस्या क्या है?
गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया (GAIL) की मुंबई–नागपुर–झारसुगुडा मुख्य गैस पाइपलाइन 28 दिसंबर से शुरू हो चुकी है।
समृद्धि महामार्ग के पास शिवमडका में कॉन्ट्रैक्टर कंपनी का ‘मदर स्टेशन’ भी तैयार कर लिया गया है।
इसके बावजूद शहर और औद्योगिक क्षेत्रों में आंतरिक पाइपलाइन नेटवर्क बिछाने का काम जनवरी 2023 से ही अधूरा पड़ा हुआ है, जिससे गैस सप्लाई शुरू नहीं हो पा रही है।
पीएनजी (PNG) के फायदे
पाइप्ड नैचुरल गैस (PNG), एलपीजी की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत सस्ती होती है।
इसके साथ ही एक बार पाइपलाइन कनेक्शन मिल जाने पर गैस खत्म होने या सिलेंडर के लिए लाइन में लगने की समस्या खत्म हो जाती है।
इस कारण उद्योगों के साथ-साथ घरेलू उपभोक्ताओं के लिए भी PNG अधिक सुविधाजनक और किफायती मानी जाती है।
कहां अटका काम?
28 दिसंबर 2025 को मुख्य गैस स्टेशन का उद्घाटन किया गया था।
लेकिन इसके बावजूद पिछले तीन वर्षों में बुटीबोरी, हिंगणा और मिहान जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों तक पाइपलाइन पूरी तरह नहीं पहुंच पाई है।
विशेषज्ञों के अनुसार अगर पाइपलाइन नेटवर्क का काम जल्द पूरा नहीं हुआ, तो बुटीबोरी के कई उद्योगों को आर्थिक नुकसान के साथ उत्पादन बंद करने की नौबत भी आ सकती है।

