कभी अरबों की मालकिन रहीं महिला, आज जीवन की कठिन परिस्थितियों से जूझ रही
मुंबई:
मुंबई में सड़क पर भीख मांगती एक बुज़ुर्ग महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दिखाई देने वाली महिला की पहचान रेखा श्रीवास्तव के रूप में की जा रही है। वायरल दावों के अनुसार, रेखा श्रीवास्तव कभी एक एयरलाइंस कंपनी की मालकिन थीं और वह भारत के पूर्व क्रिकेटर सलीम दुर्रानी की पत्नी बताई जा रही हैं। हालांकि इन दावों की अब तक परिवार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, रेखा श्रीवास्तव पिछले कुछ समय से मुंबई के एक इलाके में देखी जा रही हैं, जहां वह राहगीरों से मदद मांगती नजर आती हैं। वीडियो में वह धाराप्रवाह अंग्रेज़ी में बातचीत करती दिखाई देती हैं, जिससे उनके शिक्षित और संपन्न अतीत की ओर इशारा मिलता है।
जन्म और पृष्ठभूमि
मीडिया में सामने आई जानकारी के अनुसार, रेखा श्रीवास्तव का जन्म 1934 में काबुल (अफगानिस्तान) में हुआ था। उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड का रुख किया और 1960 के दशक में उच्च शिक्षा प्राप्त की। बताया जाता है कि
कभी रेखा श्रीवास्तव का जीवन ऐशो-आराम और रुतबे से भरा हुआ था। बड़े उद्योगपतियों, प्रभावशाली लोगों और सामाजिक हस्तियों के बीच उनकी गिनती होती थी। लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदलीं। पारिवारिक मतभेद, आर्थिक नुकसान और निजी कारणों के चलते उनका जीवन धीरे-धीरे संकट में घिरता चला गया।
सलीम दुर्रानी से जुड़ाव का दावा
सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों में कहा जा रहा है कि रेखा श्रीवास्तव पूर्व भारतीय क्रिकेटर सलीम दुर्रानी की पत्नी थीं। हालांकि इस संबंध में भी अब तक कोई आधिकारिक रिकॉर्ड या पारिवारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे इस दावे की पुष्टि हो सके।
परिवार की चुप्पी
इस पूरे मामले में रेखा श्रीवास्तव के परिवार या सलीम दुर्रानी के परिजनों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऐसे में महिला की वास्तविक स्थिति और पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है।
स्थानीय सामाजिक संगठनों का कहना है कि रेखा श्रीवास्तव उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण काम करने की स्थिति में नहीं हैं। उनके पास न स्थायी आवास है और न ही नियमित आय का कोई साधन। संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि महिला की पहचान की औपचारिक पुष्टि कर उन्हें इलाज, आश्रय और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
यह मामला एक बार फिर समाज और व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है कि क्या कभी सम्मान और संपन्नता का जीवन जी चुके लोगों को कठिन समय में पर्याप्त सहारा मिल पाता है या नहीं।

