नागपुर: त्योहार जहां खुशियों और उल्लास का प्रतीक होते हैं, वहीं कभी-कभी एक छोटी सी नादानी और अनियंत्रित गुस्सा बड़ी त्रासदी में बदल जाता है। महाराष्ट्र के नागपुर जिले से रंगपंचमी के दिन एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार यह घटना नागपुर जिले के कोराडी क्षेत्र के ‘आरामशिन’ इलाके की है। मंगलवार सुबह करीब 8:30 बजे कुछ बच्चे रंगपंचमी का त्योहार मना रहे थे। इसी दौरान 5 साल का एक मासूम बच्चा अपनी पिचकारी से पानी उड़ा रहा था।
खेल-खेल में बच्चे ने पास से गुजर रही अपनी एक पड़ोसी बुजुर्ग महिला पर पिचकारी से पानी डाल दिया। बताया जा रहा है कि यह सामान्य शरारत थी, लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने सभी को स्तब्ध कर दिया।
गुस्से में खौलता पानी फेंकने का आरोप
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बच्चे की इस हरकत से महिला कथित तौर पर बेहद नाराज़ हो गई। आरोप है कि गुस्से में महिला ने पास में रखी खौलते हुए गर्म पानी की बाल्टी उठाकर सीधे मासूम पर उंडेल दी।
यह पूरी घटना पास के एक घर में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि कैसे कुछ ही सेकंड में त्योहार का माहौल चीख-पुकार में बदल गया।
मासूम गंभीर रूप से झुलसा
गर्म पानी गिरते ही बच्चा बुरी तरह झुलस गया। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, बच्चे के कमर के नीचे का हिस्सा गंभीर रूप से जल गया है। घटना के तुरंत बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने उस पर ठंडा पानी डाला और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया।
फिलहाल बच्चे की हालत को लेकर विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार है। वहीं, घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग आरोपी महिला के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
पुलिस जांच और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
अब तक इस मामले में पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। स्थानीय प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा है। CCTV फुटेज को भी साक्ष्य के तौर पर देखा जा रहा है।
सावधानी और संयम की जरूरत
यह घटना एक गंभीर संदेश देती है कि त्योहारों के दौरान संयम और धैर्य बनाए रखना बेहद जरूरी है। बच्चों की मासूम शरारतों पर गुस्से से प्रतिक्रिया देना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।
हालांकि, इस मामले में अभी आधिकारिक पुष्टि और पुलिस जांच का इंतजार है, लेकिन यह घटना समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि कहीं हम उत्सव के नाम पर अपनी संवेदनाएं तो नहीं खो रहे।

