महाराष्ट्र पहली ट्रिलियन‑डॉलर अर्थव्यवस्था बनने की राह पर: CM फडणवीस

नागपुर:
महाराष्ट्र राज्य भारत का पहला ट्रिलियन‑डॉलर अर्थव्यवस्था वाला राज्य बनने के मार्ग पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है, ऐसा दावा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया है। महाराष्ट्र सरकार ने एक विस्तृत आर्थिक रोडमैप तैयार किया है, जिसका लक्ष्य 2029‑30 तक राज्य की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹83 लाख करोड़ से अधिक) तक ले जाना है — और इसके लिए विशेष रणनीति बनायी गयी है

फडणवीस ने यह बयान राज्य विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान देते हुए कहा कि महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था ने पहले ही अर्ध‑ट्रिलियन‑डॉलर मार्क (लगभग 500 अरब डॉलर) पार कर लिया है और अब आगे बढ़ने के लिए सरकार ने “Viksit Maharashtra 2047” नामक कार्यक्रम को लागू कर रखा है। इसके तहत 2030, 2035 और 2047 के लिए लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं, जिससे राज्य की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित हो सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र ने अब तक विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के मामले में भी मजबूत प्रदर्शन किया है, जिसमें राज्य को भारत के कुल FDI का लगभग 31% हिस्सा मिला है। अप्रैल 2022 से 2025 के बीच राज्य सरकार ने निवेश समझौतों (MOUs) को भी लगभग ₹17.58 लाख करोड़ तक साइन किया है, जिनमें से करीब 75% परियोजनाएँ पहले से लागू हो चुकी हैं।

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सरकार कृषि, ऊर्जा, उद्योग और सेवा क्षेत्रों में वृद्धि के लिए कई योजनाएँ लागू कर रही है, जिनमें

  • किसानों को मुफ़्त बिजली देने जैसी कल्याण योजनाएँ,
  • बड़े पैमाने पर सोलर पंप व्यवस्था,
  • और ग्रीन ऊर्जा लक्ष्य (2030 तक विद्युत उत्पादन में 52% तक सौर/नवीकरणीय ऊर्जा) शामिल हैं।

इसके अलावा रोजगार सृजन को भी प्राथमिकता दी जा रही है, और इसके तहत 2.4 लाख सरकारी नौकरियों के सृजन की योजना है। राज्य के बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए “Amritkal” योजना के तहत प्रमुख परियोजनाओं पर काम जारी है, जिसमें यातायात, कनेक्टिविटी और शहरी विकास शामिल हैं।

“Viksit Maharashtra 2047” — दीर्घकालिक रोडमैप

सरकार ने “Viksit Maharashtra 2047” नामक एक व्यापक विकास नीति भी प्रारंभ की है, जिसका लक्ष्य

  • 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर,
  • 2035 तक मध्य‑मुद्रा लक्ष्य,
  • और 2047 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था तक पहुंचना है।

यह नीति विशेष रूप से मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर को बढ़ावा देगी, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग को ~15% और सर्विस सेक्टर को ~12‑13% की वृद्धि दर लक्ष्य के रूप में रखा गया है। सरकार का मानना है कि यह रणनीति उद्योगों को आकर्षित करने, रोजगार सृजन और स्थानीय स्तर पर आर्थिक अवसर बढ़ाने में मदद करेगी।

राज्य की वित्तीय स्थिति और योजना

हालांकि राज्य की वित्तीय तिजोरी में चुनौती बनी हुई है, फडणवीस ने जोर देकर कहा कि महाराष्ट्र वित्तीय अनुशासन को बनाए रखते हुए भी एक मजबूत आर्थिक ढांचे पर टिका हुआ है। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि खज़ाना भरा हुआ है, परंतु सभी प्रमुख आर्थिक संकेतक — जैसे कि राज्य की ऋण‑to‑GSDP और घाटे का अनुपात — स्थिर और नियंत्रण में हैं। इन स्थितियों के बावजूद, सरकार ने भरोसा जताया कि दीर्घकालिक योजना और निवेश से राज्य समय पर ट्रिलियन‑डॉलर लक्ष्य को हासिल कर लेगा।

फडणवीस ने उत्साह जताया कि मुंबई, पुणे, नागपुर और अन्य प्रमुख शहरों में तकनीकी, वित्तीय और औद्योगिक विकास के कारण महाराष्ट्र निवेश के लिए अग्रणी केंद्र बनता जा रहा है और इन नीतियों के लागू होने से राज्य की आर्थिक क्षमता में और वृद्धि होगी।

विश्लेषकों के अनुसार, महाराष्ट्र का यह लक्ष्य न केवल उच्च आर्थिक गति दिखाता है बल्कि अंतरराष्ट्रीय निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन के लिए भी मजबूत मंच तैयार करता है। विदेशी निवेशकों की भागीदारी, तकनीकी सुधार, कृषि‑उद्योग संतुलन और बुनियादी ढांचे में विस्तार — इन सभी को एक संयुक्त रूप में लेने से राज्य की आर्थिक दिशा और सामर्थ्य दोनों स्पष्ट होती हैं।

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