कामठी: महाराष्ट्र के कामठी शहर में बनावट नोटों को चलन में लाने की कोशिश का एक गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस ने 500 रुपये की 38 बनावट नोटें एटीएम में जमा करने वाले दो सगे व्यापारी भाइयों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने यह नोटें भारतीय स्टेट बैंक के कैश डिपॉजिट एटीएम में जमा कर दी थीं ताकि वे आसानी से चलन में आ सकें। अदालत ने दोनों आरोपियों को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
पुलिस के अनुसार आरोपियों की पहचान अंशुल रविशंकर यादव (42) और आरुल रविशंकर यादव (36) के रूप में हुई है। दोनों स्वामी विवेकानंद नगर, मेन रोड, कामठी के निवासी हैं।
एटीएम में जमा की गई थीं 38 बनावट नोटें
आरोप है कि 31 जुलाई 2025 को दोनों भाइयों ने कामठी के नागपुर मार्ग स्थित गरुड़ चौक के एसबीआई एटीएम में 500 रुपये की 38 नोटें (कुल 19,000 रुपये) जमा की थीं। बाद में बैंक की जांच में यह नोटें संदिग्ध पाई गईं।
बैंक प्रबंधक ने दर्ज कराई पुलिस में शिकायत
इस मामले में भारतीय स्टेट बैंक के प्रबंधक अमोल सूर्यकांत राऊत (39) ने 30 अगस्त 2025 को कामठी (नवीन) पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस के निर्देश पर इन नोटों को नाशिक स्थित इंडियन सिक्योरिटी प्रेस लैब में जांच के लिए भेजा गया।
लैब रिपोर्ट में नोटें निकलीं बनावट
जांच के बाद इंडियन सिक्योरिटी प्रेस लैब, नाशिक ने 6 फरवरी 2026 को अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि सभी 38 नोटें बनावट हैं। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी।
सीसीटीवी फुटेज से पुलिस को मिला सुराग
पुलिस ने एटीएम कक्ष में लगे सीसीटीवी कैमरों की बारीकी से जांच की। जांच में सामने आया कि अंशुल और आरुल यादव नियमित रूप से उसी एटीएम में पैसे जमा करते थे। इसी आधार पर पुलिस ने शुक्रवार दोपहर दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया।
जांच रिपोर्ट में देरी पर उठे सवाल
इस मामले में बनावट नोटें 31 जुलाई 2025 को जमा की गई थीं, जबकि बैंक ने 30 अगस्त 2025 को शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद नोटें जांच के लिए भेजी गईं, लेकिन करीब पांच महीने बाद लैब की रिपोर्ट आई। विशेषज्ञों का कहना है कि बनावट नोटों की जांच में इतनी लंबी देरी होना गंभीर चिंता का विषय है।
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपियों के पास ये बनावट नोटें कहां से आईं और क्या इस मामले में कोई बड़ा गिरोह भी शामिल है।

