ईवीएम मशीन में गड़बड़ी का आरोप, 7 कर्मचारियों पर कार्रवाई

मतगणना केंद्र पर भारी हंगामा, जिला प्रशासन ने मानी चूक

भंडारा | विशेष संवाददाता

महाराष्ट्र में हाल ही में संपन्न नगर पंचायत और नगर परिषद चुनावों के बाद सामने आए परिणामों के बीच भंडारा जिले में ईवीएम मशीन में गंभीर गड़बड़ी का मामला सामने आया है। मतगणना के दौरान ईवीएम में नाम न होने को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद जिला प्रशासन ने जांच करते हुए 7 कर्मचारियों को तत्काल निलंबित कर दिया है।

नगरपालिका चुनाव की मतगणना के दौरान भंडारा जिले के प्रभाग क्रमांक 3 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की महिला उम्मीदवार करुणा राऊत का नाम एक ईवीएम मशीन में दर्ज नहीं होने का आरोप लगाया गया। इस संबंध में विपक्षी उम्मीदवार द्वारा चुनाव निर्णय अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराई गई थी।

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जिला प्रशासन ने मानी गलती

शिकायत के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। जांच में यह बात सामने आई कि मतगणना केंद्र पर प्रशासनिक चूक हुई है। इसके बाद भंडारा के जिलाधिकारी सावंत कुमार ने मामले को गंभीर मानते हुए मतगणना केंद्र पर तैनात 7 कर्मचारियों को निलंबित करने का आदेश जारी किया।

इस कार्रवाई के बाद जिले की राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

निलंबित किए गए कर्मचारियों के नाम

कार्रवाई की जद में आए कर्मचारियों में शामिल हैं—
1. मोहम्मद इसरार – उपविभागीय अधिकारी, टेंपार, उपसा सिंचन उपविभाग क्र. 1, आंवाडी
2. ए. एन. मळणे – तलाठी, चांदोरी
3. पीयूष शक्करवार – लिपिक टंकलेखक, नगर परिषद भंडारा
4. के. एच. लांजेवार – शिक्षक, जे. एम. पटेल कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय, भंडारा (केंद्राध्यक्ष)
5. जी. एस. नागदेवे – शिक्षक, विकास माध्यमिक शाला एवं जूनियर कॉलेज, खारबी नाका (मतदान अधिकारी क्र. 1)
6. महेश हेमराज दुर्गे – सी.ई.ओ., प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, एम.आर.आर.डी.ए. भंडारा (मतदान अधिकारी क्र. 2)
7. लीनादेवी चिचमलकर – शिक्षिका, नूतन कन्या शाला एवं जे. आर. कॉलेज भंडारा (मतदान अधिकारी क्र. 3)

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राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज

इस पूरे मामले को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि समय रहते शिकायत नहीं की जाती, तो एक उम्मीदवार के साथ अन्याय हो सकता था।

वहीं जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मामले की आंतरिक जांच पूरी कर ली गई है और भविष्य में ऐसी त्रुटियां न हों, इसके लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जाएगी।

निष्कर्ष

ईवीएम को लेकर पहले से ही देशभर में चल रही बहस के बीच भंडारा की यह घटना चुनावी व्यवस्था की जिम्मेदारी और पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से भले ही मामला शांत हुआ हो, लेकिन यह घटना चुनावी सुधारों की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करती है।

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