सावनेर–पाटणसावंगी–खापा क्षेत्र में नकली रॉयल्टी और फर्जी e-TP का इस्तेमाल, ED की जाँच तेज़

मध्य प्रदेश के नाम पर तैयार किए गए दस्तावेज़, नागपुर ज़िले में अवैध रेत परिवहन

नागपुर ज़िले के सावनेर क्षेत्र में सामने आए रेत की फर्जी रॉयल्टी मामले में जांच के दौरान बड़े पैमाने पर संगठित साजिश का खुलासा हुआ है। इस प्रकरण में सावनेर, पाटणसावंगी और खापा सहित विभिन्न इलाकों के कई आरोपी शामिल पाए गए हैं।

  • Save

जांच के अनुसार, सावनेर के विनोद गुप्ता, प्रफुल कापसे, लक्ष्मीकांत सातपुते, दादू कोलते; पाटणसावंगी के शरद राय, मनोज गायकवाड, गुड्डू खोरगडे तथा खापा के अमित राय समेत अन्य लोगों पर रेत परिवहन के लिए फर्जी रॉयल्टी दस्तावेज़ और इलेक्ट्रॉनिक ट्रांज़िट पास (e-TP) का इस्तेमाल करने का आरोप है। इस संबंध में संबंधित आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।

तफ्तीश में यह बात स्पष्ट हुई है कि वास्तविक रेत उत्खनन और परिवहन नागपुर ज़िले में किया जा रहा था, जबकि कागज़ों में इसे मध्य प्रदेश से दर्शाया गया। जांच एजेंसियों को पता चला है कि मध्य प्रदेश के कुछ स्थानों का हवाला देकर नकली e-TP और रॉयल्टी दस्तावेज़ तैयार किए जाते थे, जिन्हें नागपुर ज़िले में अवैध रेत परिवहन के लिए उपयोग किया जा रहा था।

नागपुर पुलिस और अपराध शाखा की जांच में यह सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क के ज़रिए सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुँचाया गया और शासन को गुमराह कर अवैध खनिज परिवहन किया गया। प्राथमिक जांच में फर्जी दस्तावेज़ों के योजनाबद्ध और संगठित उपयोग की पुष्टि हुई है।

अब इस कार्रवाई में एक नया मोड़ यह है कि इसमें पूर्व मंत्री सुनील केदार के कई करीबी लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं। साथ ही, अभी के रामटेक के सांसद श्याम कुमार उर्फ बबलू बर्वे के करीबी लोगों के नाम भी इस मामले में जुड़ने की चर्चा है। ऐसे में एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इस पूरे मामले के चलते किसी सांसद को जेल की हवा खानी पड़ सकती है?

फिलहाल क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर ज़ोरदार चर्चा चल रही है और आगे की जांच पर सभी की नज़रें टिकी हुई हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share via
Copy link