5 दिनों में 4 बार टूटी पाइपलाइन

धरमपेठ में गहराया जल संकट, ठेकेदारों की लापरवाही से नागरिक परेशान

नागपुर | नगर संवाददाता | नागपुर शहर के धरमपेठ जोन में बीते कुछ दिनों से लगातार जलापूर्ति पाइपलाइन टूटने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में गंभीर जल संकट पैदा हो गया है। पिछले पांच दिनों के भीतर 200 मिमी व्यास वाली जलापूर्ति पाइपलाइन चार बार क्षतिग्रस्त हुई, जिसके चलते हजारों नागरिकों को पानी की भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

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जानकारी के अनुसार क्षेत्र में चल रहे सड़क और अन्य निर्माण कार्यों के दौरान ठेकेदारों की लापरवाही के कारण पाइपलाइन को बार-बार नुकसान पहुंचा। इन घटनाओं की शुरुआत 13 दिसंबर को हुई, जब सीमेंट सड़क निर्माण के दौरान जलापूर्ति की 200 मिमी व्यास की पाइपलाइन टूट गई। इसके बाद 16 दिसंबर को निर्माण कार्य के मलबे के गिरने से मुख्य पाइपलाइन को फिर नुकसान पहुंचा। उसी दिन सॉकेट जॉइंट के पास पहली बार मरम्मत की गई, लेकिन लगभग तीन मीटर दूरी पर पाइपलाइन दोबारा क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे पानी की आपूर्ति फिर बाधित हो गई।

अगले ही दिन 17 दिसंबर को एक बार फिर 200 मिमी पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा। लगातार हो रही इन घटनाओं के कारण धरमपेठ क्षेत्र की जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। रामनगर, सुरेंद्रनगर, पांडराबोडी, हिल टॉप, जयप्रकाश नगर और सेवानगर जैसे इलाकों में लंबे समय तक पानी की आपूर्ति ठप रही, जिससे नागरिकों को मजबूरन टैंकरों के सहारे पानी मंगवाना पड़ा।

इन घटनाओं को लेकर ऑरेंज सिटी वॉटर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। नागरिकों का कहना है कि हर बार पाइपलाइन की मरम्मत तो की जाती है, लेकिन समस्या के मूल कारण को दूर नहीं किया जा रहा है। अस्थायी मरम्मत के चलते पाइपलाइन बार-बार टूट रही है और आम लोगों को बार-बार जल संकट झेलना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिक संगठनों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जलापूर्ति से जुड़े सभी निर्माण कार्यों से पहले पाइपलाइन की स्थिति की जांच और ऑडिट अनिवार्य किया जाना चाहिए। इसके साथ ही खुदाई या यांत्रिक ड्रिलिंग जैसे कार्य शुरू करने से पहले ठेकेदारों और ऑरेंज सिटी वॉटर के बीच बेहतर समन्वय होना जरूरी है, ताकि जलापूर्ति जैसी आवश्यक सेवा को नुकसान न पहुंचे।

लगातार पानी की किल्लत और अनिश्चित आपूर्ति से क्षेत्र के नागरिकों में भारी रोष है। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्यों की कमजोर निगरानी और ठेकेदारों की गैर-जिम्मेदारी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि दोषी ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और जलापूर्ति व्यवस्था को स्थायी रूप से दुरुस्त करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

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