मनपा रिपोर्ट नहीं दिखाती, नोटिस का जवाब तक नहीं देती NMC
नागपुर।
नागपुर शहर में पीने के पानी को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। शहर का बड़ा हिस्सा इस समय डेंजर ज़ोन में है, जहां नागरिकों को मिलने वाला पानी भारी रूप से प्रदूषित बताया जा रहा है। स्थिति यह है कि नगर निगम (NMC) को बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद न तो कोई ठोस रिपोर्ट सार्वजनिक की जा रही है और न ही नोटिसों का जवाब दिया जा रहा है। इससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि सीवर लाइन और जलापूर्ति लाइनों की जर्जर हालत के कारण गंदा पानी सीधे पीने के पानी में मिल रहा है। कई इलाकों में सीवर लाइन पुरानी हो चुकी हैं और उनमें बार-बार लीकेज हो रहा है। इससे प्रदूषित पानी पाइपलाइन में प्रवेश कर रहा है, जिसे लोग मजबूरी में पी रहे हैं।
महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी) ने इस स्थिति को लेकर नगर निगम को कई बार चेतावनी और नोटिस जारी किए हैं। एमपीसीबी का कहना है कि कन्हान नदी और आसपास के जलस्रोत पूरी तरह प्रदूषित हो चुके हैं और इसी पानी को बिना पर्याप्त ट्रीटमेंट के शहर में आपूर्ति किया जा रहा है।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, शहर को पानी देने वाले ट्रीटमेंट प्लांट्स में से कई पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहे। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स की हालत खराब है।
बताया गया है कि 403 एमएलडी गंदा पानी बिना पूरी सफाई के नदी में छोड़ा जा रहा है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।
पेंच और कन्हान से होती है आपूर्ति
नागपुर शहर को मुख्य रूप से पेंच और कन्हान नदी से पानी की आपूर्ति होती है। जानकारी के अनुसार, शहर में कुल 5 ट्रीटमेंट प्लांट हैं, जिनके माध्यम से पानी को शुद्ध कर शहर में भेजा जाता है। लेकिन कन्हान नदी में औद्योगिक अपशिष्ट, घरेलू गंदगी और रसायन मिलने के कारण पानी की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है।
प्रदूषण नियंत्रण मंडल का स्पष्ट कहना है कि जब तक सीवर लाइन, पाइपलाइन और ट्रीटमेंट सिस्टम की मरम्मत और सुधार नहीं किया जाता, तब तक स्थिति नियंत्रित नहीं हो सकती। विशेषज्ञों ने चेताया है कि यदि नागरिकों को इसी तरह प्रदूषित पानी पीना पड़ा, तो त्वचा रोग, पेट की बीमारियां, किडनी और लीवर से जुड़ी गंभीर समस्याएं बढ़ सकती हैं।
रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
पर्यावरण कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि नगर निगम जल गुणवत्ता से संबंधित रिपोर्ट सार्वजनिक करे, ताकि लोगों को यह जानकारी मिल सके कि वे कैसा पानी पी रहे हैं। साथ ही, सीवर और जलापूर्ति लाइनों की तत्काल मरम्मत, अवैध नालों को बंद करने और ट्रीटमेंट प्लांट्स को पूरी क्षमता से चालू करने की मांग की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो नागपुर में यह जल संकट एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकता है।

