14 मामलों में अपराध दर्ज, विभाग की सतर्कता से मिली सफलता
नागपुर जिले में बाल विवाह जैसी गंभीर सामाजिक बुराई के खिलाफ चल रही मुहिम को बीते पांच वर्षों में उल्लेखनीय सफलता मिली है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021 से 2026 के बीच जिले में कुल 59 बाल विवाह समय रहते रोके गए, जिनमें से 14 मामलों में संबंधित पुलिस थानों में आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की गई। यह उपलब्धि प्रशासनिक सतर्कता, विभागीय समन्वय और आम नागरिकों की सक्रिय भूमिका का परिणाम मानी जा रही है।
बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास के लिए भी गंभीर खतरा है। इसके बावजूद यह कुप्रथा आज भी समाज के कुछ हिस्सों, विशेषकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों में, परंपरा और सामाजिक दबाव के चलते देखने को मिल जाती है। हालांकि नागपुर जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस विभाग, शिक्षा विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों की सजगता के कारण कई मामलों में समय रहते हस्तक्षेप किया गया और बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया जा सका।
महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्रालय द्वारा जारी शासन निर्णय के तहत राज्य के प्रत्येक जिले में बाल विवाह प्रतिबंधक कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के अंतर्गत शहरी और ग्रामीण दोनों स्तरों पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। गांव-गांव और बस्तियों में बैठकों, स्कूलों में संवाद कार्यक्रमों और जनसंपर्क गतिविधियों के माध्यम से लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी जा रही है। इसका सकारात्मक असर यह हुआ है कि कई मामलों में स्वयं नागरिकों ने आगे आकर प्रशासन को सूचना दी।
जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी सुनीता मेहरे ने बताया कि बाल विवाह रोकने में केवल विभागीय सतर्कता ही नहीं, बल्कि समाज की सहभागिता भी अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने कहा कि जैसे ही किसी बाल विवाह की सूचना मिलती है, संबंधित विभाग और पुलिस तत्काल मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई करते हैं, जिससे विवाह संपन्न होने से पहले ही उसे रोका जा सके।
इस पूरी प्रक्रिया में चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 एक मजबूत और प्रभावी कड़ी के रूप में सामने आई है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अनुसार लड़कों के लिए न्यूनतम विवाह आयु 21 वर्ष और लड़कियों के लिए 18 वर्ष निर्धारित है। इससे कम आयु में विवाह करना दंडनीय अपराध है। अधिकारियों के अनुसार, बाल विवाह से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सूचनाएं हेल्पलाइन 1098 के माध्यम से प्राप्त हुईं, जिन पर त्वरित कार्रवाई कर बच्चों को बचाया गया।
जिला बाल संरक्षण अधिकारी मुराद पाटिल ने बताया कि यदि कहीं भी बाल विवाह की तैयारी या आयोजन की जानकारी मिलती है, तो नागरिकों को तुरंत 1098 पर सूचना देनी चाहिए। इससे प्रशासन को समय पर कार्रवाई करने में मदद मिलती है और बच्चों को शोषण से बचाया जा सकता है।
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021–22 में 12, 2022–23 में 4, 2023–24 में 9, 2024–25 में 17 और 2025–26 में 13 बाल विवाह रोके गए। इस प्रकार कुल 59 मामलों में हस्तक्षेप कर बच्चों का भविष्य सुरक्षित किया गया। इन मामलों को रोकने में महिला एवं बाल विकास विभाग की सतर्कता, चाइल्ड हेल्पलाइन पर प्राप्त शिकायतें, ग्राम बाल संरक्षण समितियों की सक्रिय भूमिका, पुलिस, शिक्षा विभाग और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) का समन्वय तथा स्कूल ड्रॉपआउट बच्चों की समय पर पहचान जैसे कारण निर्णायक साबित हुए।
अधिकारियों का कहना है कि कुछ मामलों में सामाजिक विरोध, दबाव और परंपरागत सोच का सामना भी करना पड़ा, लेकिन प्रशासन की सख्ती और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते बाल विवाह को रोका जा सका। यह प्रयास न केवल बच्चों के अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि समाज को एक स्वस्थ और सुरक्षित दिशा में आगे बढ़ाने की मजबूत पहल भी है।

