छठ पर्व — आस्था, विज्ञान और स्वास्थ्य का अद्भुत संगम”

Veer Singh (8055616253):
जब घाटों पर महिलाएँ मिट्टी के दीए जलाकर “छठ मईया” के गीत गाती हैं, तो यह केवल पूजा नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का उत्सव होता है।
छठ पर्व में सूर्य और प्रकृति की आराधना के साथ शरीर और मन की शुद्धि का अनोखा मेल देखने को मिलता है। इस वर्ष छठ 27 अक्टूबर को शाम का और 28 अक्टूबर समाप्ति के साथ सुबह की पूजा है

स्वास्थ्य और विज्ञान से जुड़ा रहस्य
आयुर्वेद में कहा गया है –
“सूर्य नाड़ी शरीर की अग्नि को नियंत्रित करती है।”
छठ व्रत में उपवास, ध्यान और स्नान — यह तीनों प्रक्रियाएँ हमारे एंडोक्राइन सिस्टम को संतुलित करती हैं। जब व्रती सूर्योदय और सूर्यास्त की रोशनी में खड़े होकर ध्यान करते हैं, तो शरीर में सेरोटोनिन और मेलाटोनिन हार्मोन सक्रिय होते हैं —
जिससे तनाव कम होता है, नींद बेहतर होती है, और मन को स्थिरता मिलती है।

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विटामिन डी और प्राकृतिक डिटॉक्स का पर्व
वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो, छठ के दौरान प्रातः 6 से 8 बजे और शाम 4 से 6 बजे की धूप में यूवी-बी किरणों का संतुलन सर्वोत्तम होता है। ये किरणें शरीर को प्राकृतिक रूप से विटामिन D देती हैं,
जो हड्डियों, मांसपेशियों और प्रतिरक्षा तंत्र के लिए बेहद जरूरी है।
व्रती बिना किसी कृत्रिम क्रीम या सनस्क्रीन के सूर्य की ऊर्जा को ग्रहण करते हैं —
जिससे शरीर डिटॉक्स होता है और कोशिकाओं में कैल्शियम-फॉस्फोरस का संतुलन बनता है।

आस्था और पौराणिक कथाएँ
धार्मिक ग्रंथों में छठ पूजा का उल्लेख महाभारत, रामायण, विष्णु पुराण और देवीभागवत में मिलता है।
कहा जाता है कि कर्ण, जो सूर्य देव का परम भक्त था,
सबसे पहले सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा लेकर आया था।
इसके अलावा, सुकन्या और च्यवन मुनि की कथा भी यह बताती है कि सूर्य उपासना से कैसे शरीर में पुनः ऊर्जा और यौवन का संचार होता है।

पर्यावरण और लोकसंस्कृति का संबंध
छठ पर्व केवल आध्यात्मिक नहीं — यह पर्यावरणीय संतुलन का प्रतीक भी है।
इस दिन उपयोग में आने वाली हर वस्तु — बांस की टोकरी, मिट्टी के बर्तन, गन्ना, नारियल, फल-फूल —
सब कुछ प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल होता है।
यह संदेश देता है कि जीवन तभी सुंदर है जब मनुष्य प्रकृति के साथ संतुलन में रहे।

छठ मईया का संदेश
यह पर्व हमें सिखाता है कि संयम ही सबसे बड़ा साधन है।
उपवास केवल भोजन का नहीं — विचारों और कर्मों का भी होता है।
छठ मईया का यह व्रत हमें सिखाता है कि अगर जीवन में शुद्धता, धैर्य और संतुलन हो,
तो हर कठिनाई को पार किया जा सकता है।
“सूर्य की आराधना करने वाला यह लोक पर्व केवल परंपरा नहीं — यह स्वास्थ्य, पर्यावरण और आध्यात्मिकता का संतुलित विज्ञान है।
छठ मईया के इस पावन अवसर पर, हम सब यही कामना करें —
कि हमारे जीवन में भी वैसा ही प्रकाश फैले, जैसा उगते सूरज का होता है।”

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