झुग्गी इलाकों में चुनावी रेवड़ियां बांटने के आरोप
नागपुर।
जैसे-जैसे नागपुर महानगरपालिका चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे शहर के उत्तर, पश्चिम और पूर्व नागपुर के आर्थिक रूप से पिछड़े इलाकों—खासतौर पर झुग्गी बस्तियों (स्लम क्षेत्रों)—में मतदाताओं को लुभाने के लिए अवैध तरीकों के इस्तेमाल की खबरें सामने आ रही हैं। आरोप है कि कुछ चुनावी उम्मीदवार और उनके समर्थक ‘लाड़की बहन’ योजना से वंचित महिलाओं को विशेष रूप से निशाना बना रहे हैं और उन्हें नकद राशि व उपहारों का लालच देकर अपने पक्ष में मतदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, उम्मीदवारों का मुख्य फोकस उन महिलाओं पर है जिनकी पात्रता तकनीकी कारणों से ‘लाड़की बहन’ योजना में रद्द हो गई थी या जिनके नाम जांच के दौरान ‘फर्जी लाभार्थी’ पाए जाने पर सूची से हटा दिए गए थे। ये महिलाएं आर्थिक रूप से कमजोर हैं और योजना का लाभ न मिलने के कारण असंतोष में हैं। इसी असंतोष का फायदा उठाकर चुनावी दल उन्हें नकद और उपहार देकर प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
पैसे और उपहारों का खेल
सूत्रों का दावा है कि एक प्रमुख उम्मीदवार द्वारा प्रति महिला 2,500 रुपये नकद देने की पेशकश की जा रही है। वहीं, प्रतिद्वंद्वी दल 1,500 रुपये के पैकेट बांटकर अनिश्चित और असंतुष्ट मतदाताओं को अपनी ओर खींचने का प्रयास कर रहे हैं।
इसके अलावा ‘पैसा और पार्टी’ की रणनीति के तहत कुछ इलाकों में नकद राशि के साथ-साथ शराब के पाउच भी बांटे जाने की शिकायतें मिली हैं।
कलमना रिंग रोड, गोरेवाड़ा सहित कई झुग्गी इलाकों में हर रात ‘मटन पार्टियां’ आयोजित किए जाने की खबर है। युवाओं के लिए बिरयानी और दावतों का इंतजाम किया जा रहा है, जबकि महिलाओं को गुप्त रूप से रसोई के बर्तन, घरेलू सामान और अन्य उपहार दिए जा रहे हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य स्पष्ट रूप से वोटों को प्रभावित करना बताया जा रहा है।
प्रशासन की कार्रवाई और चुनौतियां
उत्तर, पूर्व और पश्चिम नागपुर के कई इलाकों में, जहां 425 से अधिक अधिसूचित और गैर-अधिसूचित झुग्गियां हैं, इस तरह की गतिविधियों का केंद्र बनते जा रहे हैं। प्रशासन के लिए इन क्षेत्रों में निगरानी एक बड़ी चुनौती बन गई है।
पुलिस ने हाल ही में जरीपटका क्षेत्र में भारी मात्रा में नकदी जब्त की है। फ्लाइंग स्क्वॉड और चुनाव आयोग की टीमें लगातार सक्रिय हैं और पांचपावली व आसपास के इलाकों में कड़ी निगरानी रखी जा रही है। इसके बावजूद चुनावी प्रलोभनों पर पूरी तरह लगाम लगाना प्रशासन के लिए कठिन साबित हो रहा है।
‘लाड़की बहन’ योजना से जुड़ी महिलाओं को केंद्र में रखकर की जा रही यह कथित चुनावी रणनीति न केवल आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े करती है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन और चुनाव आयोग इन गतिविधियों पर कितनी प्रभावी कार्रवाई कर पाते हैं।

