नागपुर, नगर संवाददाता।
नागपुर नगर निगम चुनाव को लेकर भाजपा में आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई। 15 जनवरी को होने वाले 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव से पहले टिकट वितरण को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। 2 जनवरी को नामांकन वापसी के दिन शहर में उस समय हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपने ही पार्टी के एक उम्मीदवार को घर में बंद कर दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भाजपा ने प्रभाग 13 (डी) से विजय इंगले उर्फ किसन गावंडे को टिकट दिया था। हालांकि बाद में पार्टी नेतृत्व ने चुनावी रणनीति में बदलाव करते हुए गावंडे को चुनावी दौड़ से हटने और नाम वापस लेने के निर्देश दिए। इस फैसले से नाराज समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने विरोध शुरू कर दिया और गावंडे को उनके ही घर में कैद कर दिया, ताकि वे रिटर्निंग ऑफिसर के पास जाकर नाम वापस न ले सकें।
घटना की सूचना मिलते ही भाजपा विधायक परिणय फुके सहित अन्य वरिष्ठ नेता मौके पर पहुंचे। नेताओं ने कार्यकर्ताओं से बातचीत कर स्थिति को शांत किया और समझाइश दी। काफी देर चले तनावपूर्ण हालात के बाद आखिरकार विजय इंगले उर्फ किसन गावंडे ने नाम वापस ले लिया, जिससे यह मामला शांत हुआ।
सूत्रों के अनुसार, भाजपा में टिकट वितरण को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। बताया गया है कि इस चुनाव में भाजपा ने केवल वर्तमान पार्षदों को ही टिकट दिए, जिससे कई कार्यकर्ता और दावेदार नाराज हैं। पार्टी में अंदरूनी असहमति इतनी बढ़ गई कि कुछ पूर्व पार्षदों ने खुलकर विरोध किया, हालांकि कई ने नाम वापसी से साफ इनकार भी कर दिया।
इन पूर्व पार्षदों ने लिया नाम वापस
नगर निगम चुनाव के अंतर्गत नामांकन वापसी के दिन राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। भाजपा के कुछ पूर्व पार्षदों ने अपना नामांकन वापस ले लिया। नाम वापस लेने वालों में हरिश दिकोंडवार, रीता मुडे, श्रद्धा पाठक, अमर बागड़े और वर्षा ठाकरे शामिल हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, संगठनात्मक निर्णय और वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद इन पूर्व पार्षदों ने चुनावी दौड़ से हटने का फैसला किया।
कांग्रेस में वापस लिए गए नाम
इसी तरह कांग्रेस में भी नाम वापसी देखने को मिली। भाजपा नेताओं के फोन आने के बाद कांग्रेस से नामांकन भरने वाले कुछ बागियों द्वारा भी नाम वापस लिए गए। कांग्रेस से नाम वापस लेने वालों में पूर्व पार्षद कमलेश चौधरी, पुरुषोत्तम हजारे, आशा उइके, जिशान मुमताज अंसारी और अरुण दवाट प्रमुख रूप से शामिल हैं।
नगर निगम चुनाव से पहले हुए इस घटनाक्रम ने दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों में आंतरिक रणनीति और चुनावी समीकरणों को स्पष्ट रूप से सामने ला दिया है।

