सावधान! जांच पर्ची पर लगा छोटा सा कोड और आपकी जेब से हजारों रुपये गायब

नागपुर के चिकित्सा क्षेत्र में इन दिनों ‘कट-प्रैक्टिस’ का संगठित नेटवर्क तेजी से फैलता जा रहा है। जांच के नाम पर मरीजों से अनावश्यक पैसे वसूलने का खेल खुलेआम चल रहा है। एक ओर मरीज और उनके परिजन बीमारी की चिंता में होते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ डॉक्टर, पैथोलॉजी लैब और डायग्नोस्टिक सेंटरों की सांठगांठ से उनकी जेब पर भारी बोझ डाला जा रहा है।

यह तथाकथित ‘कट-प्रैक्टिस’ दरअसल अवैध कमीशनखोरी का एक रूप है, जिसमें मरीज को रेफर करने के बदले डॉक्टर को तय प्रतिशत में कमीशन दिया जाता है। यही कमीशन मरीज से अधिक दर वसूलकर निकाला जाता है।

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🔎 क्या है ‘कट-प्रैक्टिस’?

  • जब कोई डॉक्टर मरीज को किसी विशिष्ट पैथोलॉजी लैब, रेडियोलॉजी या डायग्नोस्टिक सेंटर में जांच के लिए भेजता है।
  • मरीज के बिल की राशि में से डॉक्टर को 30% से 50% तक कमीशन दिया जाता है।
  • यह अतिरिक्त रकम पहले से ही जांच की दर में जोड़ दी जाती है।
  • कई मामलों में गैर-जरूरी जांचें भी केवल कमीशन के लिए लिखी जाती हैं।

💰 दरों में भारी अंतर, सीधी लूट का खेल

सूत्रों के अनुसार, रेफर किए गए सेंटरों पर जांच की दरें सामान्य से कहीं अधिक होती हैं। जबकि वही जांच यदि मरीज सीधे किसी लैब में जाकर कराए तो दर कम होती है।

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📊 जांच दरों की तुलना

जांचसामान्य दररेफर मरीज की दरआर्थिक नुकसान
CBC (रक्त जांच)₹100–150₹350–500₹200–350
लिपिड प्रोफाइल₹300–450₹800–1200₹500–750
ब्लड शुगर₹100–150₹200–300₹100–150
थॉयराइड टेस्ट₹250–350₹600–900₹350–550
MRI (ब्रेन/स्पाइन)₹2500–4000₹6000–10000₹3500–6000
CT स्कैन₹1200–1800₹3000–5000₹1800–3200

स्पष्ट है कि मरीजों से दोगुनी-तिगुनी दर तक वसूली की जा रही है।

🏥 कैसे काम करता है यह नेटवर्क?

  • डॉक्टर जांच पर्ची पर एक खास कोड या निशान लगा देते हैं।
  • लैब को समझ में आ जाता है कि मरीज किस डॉक्टर द्वारा भेजा गया है।
  • महीने के अंत में संबंधित डॉक्टर तक कमीशन पहुंचा दिया जाता है।
  • इस चक्र में डॉक्टर, कलेक्शन सेंटर और लैब तीनों शामिल रहते हैं।

नागपुर में छोटे-बड़े मिलाकर 150 से अधिक पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक सेंटर संचालित हो रहे हैं। एक लैब में औसतन 25 मरीज रोजाना जांच के लिए आते हैं, जबकि डेंगू-मलेरिया सीजन में यह संख्या 100 के पार पहुंच जाती है।

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⚖ मरीज के अधिकार क्या हैं?

  • मरीज को अधिकार है कि वह किसी भी प्रमाणित लैब से जांच करवा सकता है।
  • डॉक्टर मरीज पर किसी विशेष सेंटर में जांच कराने का दबाव नहीं डाल सकता।
  • सरकार को चाहिए कि सभी जांचों के लिए प्राइस कैपिंग लागू करे।
  • प्रत्येक सेंटर में जांच दरों की स्पष्ट सूची बोर्ड पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित की जाए।

❗ कब रुकेगी यह लूट?

जब तक जांच दरों पर सरकारी नियंत्रण और पारदर्शिता लागू नहीं होती, तब तक यह कमीशनखोरी का खेल जारी रहने की आशंका है। स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर चल रहे इस गोरखधंधे पर लगाम लगाने के लिए सख्त निगरानी और ठोस कार्रवाई आवश्यक है।

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