Bajaj Finance Ltd. के खिलाफ सेवा में कमी और अनुचित कार्यवाही पर सख्त आदेश जारी किया

नागपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बजाज फाइनेंस को उपभोक्ता सेवा में कमी और आरबीआई (Reserve Bank of India) के निर्देशों का उल्लंघन करने पर दोषी ठहराया और कंपनी को मुआवजा देने का आदेश दिया

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• शिकायत और विवाद का कारण

यह मामला तब सामने आया जब शिकायतकर्ता आशा राय बदाना ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने जनवरी 2021 में ₹3,60,000 का लोन लिया था, जिसकी ईएमआई प्रबंधन और ईसीएस (ECS mandate) में गड़बड़ी और बिना अनुमति से गलत राशि व बिना ग्राहक की मंजूरी के लंबी अवधि के लिए डेबिट व्यवस्था होने का आरोप लगाया।

• मुख्य आरोप और आयोग की व्याख्या

बजाज फाइनेंस ने बिना ग्राहक की सहमति के ECS में ₹50,000 का वैधता 2041 तक का निर्देश दर्ज किया, जबकि वास्तविक ईएमआई मात्र ₹8,564 थी। शिकायतकर्ता ने इस गलती को सुधारने का अनुरोध किया, लेकिन कंपनी ने बदलाव केवल शाखा में व्यक्तिगत रूप से आकर करने को कहा जो मुश्किल था।

• बड़े समाधान और नुकसान

जब शिकायतकर्ता ने अपनी बचत खाते से धन निकालने का प्रयास किया, तो लगभग 50 दिनों तक उसके बैंक खाते को फ्रीज़ कर दिया गया, जिससे वह अपने ₹2,41,000 तक नहीं पहुँच सकीं। आयोग ने इसे अनपेक्षित, अनुचित और सेवा में कमी माना।

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• आयोग का निर्णय और आदेश

  • ₹25,000: शारीरिक, मानसिक और वित्तीय कष्ट के लिए मुआवजा
  • ₹10,000: मुकदमे के खर्च के रूप में
  • आदेश के पालन की अंतिम समय सीमा: आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर
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• आयोग का संदेश

आयोग ने स्पष्ट किया कि वित्तीय संस्थाएँ अपने ग्राहकों के ECS निर्देशों को बिना स्पष्ट सहमति बदल नहीं सकतीं, और यदि ऐसी गलतियाँ होती हैं या ग्राहक की धनराशि तक पहुँच रोकी जाती है तो यह सेवा की कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना जाएगा।

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