नागपुर में आज किसान, दिव्यांग, मछुआरे और मेंढपाळ समुदायों के अधिकारों के लिए बच्चू कडू के नेतृत्व में एक विशाल “महा एल्गार रैली” आयोजित की जा रही है। यह आंदोलन किसानों की कर्जमाफी, फसल की उचित कीमत, दिव्यांगों के मानधन और मछुआरों के न्यायपूर्ण हक के लिए उठाई गई आवाज है। पूर्व राज्यमंत्री और प्रहार जनशक्ति पार्टी के संस्थापक बच्चू कडू स्वयं ट्रैक्टर चलाकर इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। यह यात्रा बेलोरा (अमरावती) से शुरू होकर 182 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए बुटीबोरी (नागपुर) पहुंचेगी।
रैली में हजारों किसान ट्रैक्टरों पर “जय जवान – जय किसान” के नारे लगाते हुए और तिरंगा लहराते हुए शामिल होंगे। इसमें दिव्यांग, मछुआरे, मेंढपाळ और अन्य सामाजिक वर्गों का भी समर्थन रहेगा। मेढ़ा, शेलू, बैलबंड्या जैसे गांवों से सैकड़ों लोग बच्चू कडू के साथ निकले हैं। सोलापुर से 20,000 भाकरी, मिर्ची और शेंगदाणे का खाकरा, नाशिक से प्याज और सब्जियां, लातूर से तूर दाल और अन्य अन्नधान्य भेजे गए हैं। गांव-गांव में चिवड़ा बनाने का काम भी जारी है ताकि रैली में भाग लेने वालों को भोजन की कोई परेशानी न हो।
किसानों का आक्रोश — “ना कर्जमाफी, ना भाव, ना दिलासा”
किसानों का कहना है कि सरकार ने “सातबारा कोरा” (कर्जमुक्त किसान) करने की घोषणा की थी, लेकिन आज तक कोई ठोस राहत नहीं दी गई। केंद्र सरकार की गलत आयात-निर्यात नीतियों के कारण कपास की कीमतें गिरीं, सोयाबीन का न्यूनतम आधारभूत मूल्य ₹5,353 तय होने के बावजूद किसानों को ₹3,000 या उससे कम दर पर बेचना पड़ रहा है।
किसानों ने सवाल उठाया — “क्या यही है आत्मनिर्भर भारत?”
इस रैली में हजारों किसान अपनी आवाज बुलंद करने पहुंचे हैं। बच्चू कडू ने रैली की शुरुआत करते हुए कहा — “यह एल्गार आरपार की लड़ाई है।”
महाराष्ट्र के सभी किसान नेता एकजुट
इस आंदोलन में महाराष्ट्र के कई प्रमुख किसान नेता एक मंच पर आए हैं —
विजय जावंधिया, वामनराव चटप, राजू शेट्टी, महादेव जानकर, डॉ. अजित नवले, राजन शीरसागर, प्रकाश पोहरे, दीपक केदार, प्रशांत डिक्कर और विठ्ठलराव पवार समेत कई नेता इस रैली में शामिल हैं।

