अब मशीनों से वाहनों की फिटनेस

राज्य में 54 ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर को मंजूरी

नागपुर (शहर प्रतिनिधि) : सड़क दुर्घटनाओं की संख्या कम करने और वाहन जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से परिवहन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। अब वाहनों की फिटनेस जांच मशीनों के माध्यम से की जाएगी। इसके लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (आरटीओ) में ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर (एटीसी) शुरू किए जा रहे हैं, जहां मानवीय हस्तक्षेप के बिना वाहनों की तकनीकी जांच होगी और फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा।

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महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में कुल 54 ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर स्थापित करने की मंजूरी दी है। ये केंद्र सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के आधार पर संचालित किए जाएंगे। एटीसी शुरू होने के बाद आरटीओ में एजेंटों की भूमिका समाप्त हो जाएगी और पूरी प्रक्रिया मशीन आधारित होगी।

परिवहन अधिकारियों के अनुसार, नए व्यावसायिक वाहनों को पहले दो वर्षों तक फिटनेस प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं होगी। इसके बाद हर दो वर्ष में फिटनेस प्रमाणपत्र का नवीनीकरण कराना अनिवार्य रहेगा। आठ वर्ष से अधिक पुराने वाहनों के लिए हर वर्ष फिटनेस परीक्षण कराना जरूरी होगा। फिटनेस प्रमाणपत्र की वैधता समाप्त होने पर प्रतिदिन 50 रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा।

फिटनेस टेस्ट में होगी ये जांच

ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर में वाहनों की जांच कई चरणों में की जाएगी। इसमें ब्रेक टेस्ट के जरिए ब्रेकिंग क्षमता की जांच, हेडलाइट टेस्ट से रोशनी की तीव्रता, प्रदूषण स्तर की जांच, स्पीडोमीटर की सटीकता, स्टीयरिंग का एलाइनमेंट और टायरों की स्थिति व सस्पेंशन की जांच शामिल होगी। इन सभी जांचों की रिपोर्ट कंप्यूटर सिस्टम द्वारा तैयार की जाएगी।

6 मिनट में पूरी होगी प्रक्रिया

वर्तमान में आरटीओ में फिटनेस जांच के लिए वाहन मालिकों को घंटों इंतजार करना पड़ता है, लेकिन एटीसी प्रणाली लागू होने के बाद पूरी प्रक्रिया केवल 6 मिनट में पूरी हो जाएगी। वाहन एंट्री सिस्टम से प्रवेश करेगा और सभी तकनीकी परीक्षण स्वचालित रूप से किए जाएंगे।

अत्यंत सटीक रिपोर्ट मिलेगी

क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी विजय बडगुजर ने बताया कि ऑटोमेटेड प्रणाली से सड़क सुरक्षा में बड़ा सुधार होगा। मशीनों द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट सीधे सर्वर पर अपलोड होगी, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी या अनियमितता की संभावना खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली के लागू होने से वाहन मालिकों को निष्पक्ष सेवा मिलेगी और नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित होगा।

परिवहन विभाग का मानना है कि ऑटोमेटेड फिटनेस जांच से न केवल दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि पूरे सिस्टम में पारदर्शिता और विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।

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