अरुणोदय सिकलसेल निर्मूलन अभियान

पारशिवनी | स्वास्थ्य विभाग ने 20 हजार से अधिक नागरिकों की कराई स्क्रीनिंग, पारशिवनी तहसील में सिकलसेल रोग की पहचान और जन-जागरूकता के उद्देश्य से 15 जनवरी से 7 फरवरी तक अरुणोदय सिकलसेल निर्मूलन विशेष अभियान चलाया गया।
इस अभियान के तहत 19,418 से अधिक नागरिकों की सिकलसेल स्क्रीनिंग की गई, जिसमें 268 सिकलसेल मरीजों की पहचान हुई है।

268 सिकलसेल मरीजों की पहचान

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0 से 40 वर्ष आयु वर्ग पर विशेष फोकस

यह अभियान स्वास्थ्य विभाग द्वारा 0 से 40 वर्ष आयु वर्ग के नागरिकों की स्वास्थ्य जांच के उद्देश्य से संचालित किया गया।
अभियान के दौरान नए मरीजों और सिकलसेल वाहकों (Carrier) की पहचान कर उन्हें समय पर उपचार, मार्गदर्शन और समुपदेशन उपलब्ध कराया जा रहा है।

स्वास्थ्य अमले की सक्रिय भूमिका

स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार तहसील स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अभिनंदन नागपुरकर के मार्गदर्शन में
प्राथमिक आरोग्य केंद्रों, उपकेंद्रों और स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अभियान को प्रभावी रूप से क्रियान्वित किया।

जागरूकता के लिए व्यापक प्रचार

अभियान के अंतर्गत सिकलसेल रोग के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए—

  • मुनादी
  • शालाओं व महाविद्यालयों में व्याख्यान
  • प्रभातफेरी
  • पोस्टर व पत्रक वितरण
  • सोशल मीडिया प्रचार
    जैसे विभिन्न माध्यमों का उपयोग किया गया।
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नागरिकों से सहयोग की अपील

(साइड बॉक्स)

इस विशेष अभियान का उद्घाटन पंचायत समिति के खंड विकास अधिकारी सुभाष जाधव एवं
तहसील स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अभिनंदन नागपुरकर के हाथों किया गया।

डॉ. नागपुरकर ने नागरिकों से सिकलसेल स्क्रीनिंग में अधिक से अधिक सहयोग की अपील करते हुए कहा कि
समय पर जांच और उपचार से सिकलसेल पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।

इस अभियान में तहसील स्वास्थ्य सहायक तुषार मुन, कुष्ठरोग विशेषज्ञ भागवत बोरकर सहित
अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी सक्रिय रूप से शामिल रहे।

उम्मीद की किरण

इस विशेष अभियान की सफलता के बाद पारशिवनी तहसील में
सिकलसेल रोग की शीघ्र पहचान और बेहतर उपचार व्यवस्था को लेकर
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

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सिकलसेल रोग क्या है?

सिकलसेल रोग एक आनुवांशिक (वंशानुगत) रक्त रोग है। इसमें व्यक्ति के शरीर में मौजूद लाल रक्त कण (RBC) सामान्य गोल आकार के बजाय हंसिए (दरांती) के आकार के हो जाते हैं।

इस कारण खून ठीक से शरीर में प्रवाहित नहीं हो पाता और मरीज को कमजोरी, तेज दर्द, सांस लेने में दिक्कत और बार-बार संक्रमण जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

🔹 मुख्य बातें:

  • यह बीमारी माता-पिता से बच्चों में आती है
  • खून की कमी (एनीमिया) होती है
  • समय-समय पर तेज दर्द के दौरे पड़ सकते हैं
  • सही समय पर जांच और इलाज से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है

✅ जरूरी संदेश:

सिकलसेल की जांच समय पर कराना बहुत जरूरी है, खासकर शादी से पहले और बच्चों में।
जागरूकता और इलाज से इस बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।

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