“महाराष्ट्र एक बार फिर से सन्न है… सातारा की डॉक्टर युवती की आत्महत्या के बाद अब अमरावती से भी एक दर्दनाक खबर आई है। एक 21 वर्षीय बीए की छात्रा ने फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। आखिर क्या वजह थी इस कदम के पीछे? क्या ये सिर्फ़ एक हादसा है… या समाज की चुप्पी की मार?”
अमरावती जिले के धामणगांव रेलवे तालुका के मिंभोरा बोडका गांव में रहने वाली 21 वर्षीय छात्रा श्रुती झोले ने अपने ही घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
श्रुती बीए के दूसरे वर्ष की छात्रा थी — उज्जवल भविष्य, सपनों और उम्मीदों से भरी एक जिंदगी… जो अचानक थम गई।
जब परिजनों ने देखा कि श्रुती ने फांसी लगा ली है, तो पूरे गांव में सन्नाटा छा गया। कोई यह समझ नहीं पा रहा था कि आखिर एक होनहार लड़की ने ऐसा कदम क्यों उठाया?
पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है। लेकिन अभी तक आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल सका है।
सिर्फ़ एक दिन पहले सातारा जिले की डॉक्टर युवती ने भी आत्महत्या की थी — और अब अमरावती की ये घटना। दो अलग-अलग जगहें… पर दर्द एक ही सवाल छोड़ रहा है — आखिर हमारी बेटियाँ इतनी अकेली क्यों महसूस कर रही हैं?
कितनी बार वो मुस्कान के पीछे दर्द छिपाती होंगी… कितनी बार वो मदद मांगना चाहती होंगी, लेकिन समाज, परिवार या डर ने उनकी आवाज़ दबा दी होगी।
अगर आप किसी को उदास, चुप या परेशान देखते हैं — तो उनसे बात कीजिए, उनकी सुनिए।
कभी-कभी एक बात, एक साथ, एक सहारा — किसी की जिंदगी बचा सकता है।
“आत्महत्या किसी समस्या का हल नहीं… बल्कि कई जिंदगियों की शुरुआत का अंत है।”
“श्रुती जैसी बेटियाँ हमें याद दिलाती हैं कि हमें एक संवेदनशील समाज बनने की ज़रूरत है — जहाँ कोई भी लड़की, कोई भी बेटा, अपनी तकलीफ़ अकेले न झेले।”

