तुर्की ने आसमान में पहली बार किया सफल जॉइंट फॉर्मेशन
अंकारा: रक्षा और एयरोस्पेस तकनीक के क्षेत्र में तुर्की ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। तुर्की ने पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से फाइटर जेट और ड्रोन के बीच सफल जॉइंट फॉर्मेशन फ्लाइट का प्रदर्शन किया है। इस उपलब्धि को भविष्य के हवाई युद्ध की दिशा बदलने वाला कदम माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, तुर्की की प्रमुख रक्षा कंपनी Baykar द्वारा विकसित बिना पायलट वाला लड़ाकू विमान किज़िलेमा (Kızılelma) ने मानव चालित फाइटर जेट के साथ समन्वित उड़ान भरी। यह परीक्षण निगरानी या सीमित हमले वाले पारंपरिक ड्रोन से अलग था और पूरी तरह उन्नत AI आधारित सिस्टम पर संचालित किया गया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस उड़ान के दौरान किसी भी प्रकार का प्रत्यक्ष मानवीय नियंत्रण नहीं था। ड्रोन की पूरी उड़ान AI आधारित फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम द्वारा संचालित की गई, जिसमें सेंसर, रियल-टाइम डेटा प्रोसेसिंग और स्वायत्त निर्णय लेने की क्षमता शामिल थी। ड्रोन ने फाइटर जेट के साथ दूरी, दिशा और गति को सटीक रूप से बनाए रखा।
किज़िलेमा ड्रोन एक शक्तिशाली टर्बोफैन इंजन से लैस है और इसका अधिकतम टेक-ऑफ वजन करीब 6,000 किलोग्राम बताया गया है। यह ड्रोन जमीन से उड़ान भरने के साथ-साथ तुर्की नौसेना के युद्धपोत टीसीजी अनादोलु जैसे प्लेटफॉर्म से भी संचालित किया जा सकता है।
परीक्षण के दौरान ड्रोन और फाइटर जेट ने नजदीक रहते हुए हाई-स्पीड फॉर्मेशन फ्लाइट की। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी तेज गति पर मानव चालित विमान और AI नियंत्रित ड्रोन के बीच तालमेल स्थापित करना अब तक बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता था।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य के हवाई युद्ध में बड़ा बदलाव ला सकती है। AI आधारित ड्रोन न केवल निगरानी और खुफिया अभियानों में उपयोगी होंगे, बल्कि जोखिम भरे हमलों में मानव पायलट की भूमिका को भी कम कर सकते हैं। तेज निर्णय, सटीक लक्ष्य निर्धारण और सामूहिक रणनीति के चलते यह तकनीक आधुनिक युद्ध प्रणाली को और अधिक प्रभावी बना सकती है।
तुर्की की इस सफलता को वैश्विक स्तर पर AI आधारित हवाई युद्ध तकनीक में बड़ी छलांग के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में सैन्य रणनीतियों को पूरी तरह बदल सकती है।

