आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने बैंकों की न्यूनतम बैलेंस पेनल्टी नीति पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे गरीबों के साथ अन्याय बताया है। उन्होंने कहा कि बैंक गरीब ग्राहकों को सजा देकर भारी मुनाफा कमा रहे हैं, जो एक चिंताजनक स्थिति है।
राघव चड्ढा ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि देश में बड़ी संख्या में लोग कम आय वर्ग से आते हैं, जिनके लिए खाते में न्यूनतम बैलेंस बनाए रखना हमेशा संभव नहीं होता। ऐसे में बैंक उन पर जुर्माना लगाकर अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं।
गरीबों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ
राघव चड्ढा के मुताबिक, न्यूनतम बैलेंस न रखने पर लगने वाली पेनल्टी से गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ता है। यह नीति उन लोगों के लिए और मुश्किलें खड़ी करती है जो पहले से ही आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं।
बैंकों के मुनाफे पर उठाए सवाल
उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक इस तरह की पेनल्टी के जरिए करोड़ों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। यह तरीका आम जनता, खासकर गरीबों के लिए अनुचित और असंवेदनशील है।
नीति में बदलाव की मांग
राघव चड्ढा ने सरकार और संबंधित संस्थाओं से मांग की है कि इस नीति की समीक्षा की जाए और ऐसे नियम बनाए जाएं जिससे गरीब ग्राहकों को राहत मिल सके।
जनता में बढ़ रही नाराजगी
इस मुद्दे को लेकर आम लोगों में भी नाराजगी बढ़ती जा रही है। कई ग्राहकों का मानना है कि बैंकिंग सेवाएं आसान और सुलभ होनी चाहिए, न कि जुर्माने के जरिए बोझ बढ़ाने वाली।

