पहली बार घर खरीदना हर व्यक्ति के जीवन का बड़ा सपना होता है। यह केवल एक संपत्ति नहीं, बल्कि सुरक्षा, स्थिरता और भविष्य की योजना से जुड़ा फैसला होता है। लेकिन जानकारी की कमी और भावनाओं में बहकर लिए गए फैसले कई बार इस सपने को परेशानी में बदल देते हैं।
सबसे बड़ी गलती जो लोग करते हैं, वह है केवल कीमत देखकर प्रॉपर्टी चुन लेना। सस्ता घर बाद में महंगा साबित हो सकता है अगर वहां परिवहन, स्कूल, अस्पताल या रोजगार के साधन न हों। लोकेशन हमेशा प्रॉपर्टी की वैल्यू तय करती है।
दूसरी आम चूक है बिल्डर और प्रोजेक्ट की पृष्ठभूमि की जांच न करना। RERA रजिस्ट्रेशन, पुराने प्रोजेक्ट्स की डिलीवरी और कानूनी विवादों की जानकारी लिए बिना घर खरीदना जोखिम भरा हो सकता है।
कई खरीदार कानूनी दस्तावेजों को ठीक से पढ़े बिना एग्रीमेंट साइन कर देते हैं। टाइटल क्लियर है या नहीं, ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट, अप्रूवल प्लान और प्रॉपर्टी टैक्स जैसे पहलू बेहद जरूरी होते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
एक और बड़ी गलती है बजट से बाहर जाकर घर खरीदना। सिर्फ होम लोन की EMI ही नहीं, बल्कि स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन, मेंटेनेंस, इंटीरियर और भविष्य के खर्चों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
इसके अलावा, कई लोग होम लोन की शर्तों को समझे बिना जल्दबाजी में साइन कर देते हैं। ब्याज दर, फ्लोटिंग या फिक्स्ड विकल्प और प्री-पेमेंट चार्ज जैसे बिंदुओं को समझना बेहद जरूरी है।
अगर घर खरीदते समय सही रिसर्च, विशेषज्ञ सलाह और कानूनी जांच की जाए, तो यह फैसला न केवल सुरक्षित बनता है, बल्कि जीवन भर का सुकून भी देता है।

