12 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान
नागपुर, कार्यालय प्रतिनिधि।
राज्यभर में चर्चित बोगस छात्र आईडी घोटाले के मामले में साइबर पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वर्धा निवासी शिक्षाधिकारी रविंद्र शंकरराव काटोलकर को गिरफ्तार किया है। आरोपी को वर्धा से गिरफ्तार कर नागपुर लाया गया, जहां अदालत ने उसे 25 दिसंबर तक पुलिस कस्टडी रिमांड (PCR) पर भेज दिया है।
साइबर पुलिस की जांच में सामने आया है कि काटोलकर के कार्यकाल के दौरान शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के वेतन से संबंधित 39 फर्जी छात्र आईडी प्रस्ताव उनके पास प्रस्तुत किए गए थे। आरोप है कि इन प्रस्तावों की बिना उचित जांच-पड़ताल के मंजूरी दे दी गई, जिससे सरकार को करीब 12 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान हुआ।
जानकारी के अनुसार, इस घोटाले की जांच और गिरफ्तारी को रोकने के लिए शिक्षा विभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारी और शिक्षा संस्था संचालकों ने उच्च स्तर पर प्रयास किए थे, यहां तक कि पुलिस के हाथ बांधने की भी कोशिश की गई। इसके बावजूद साइबर पुलिस की स्वतंत्र जांच में लगातार नए नाम सामने आ रहे हैं।
काटोलकर वर्तमान में यवतमाल में कार्यरत हैं। इससे पहले वे नागपुर में शिक्षाधिकारी तथा नागपुर विभागीय शिक्षा मंडल में उपसचिव पद पर भी कार्य कर चुके हैं। एसआईटी से मिली जानकारी के अनुसार, 24 दिसंबर 2021 से मार्च 2022 के बीच वे जिला परिषद में शिक्षाधिकारी (प्राथमिक) के पद पर पदस्थ थे।
जांच का दायरा बढ़ा
डीसीपी नित्यानंद झा के मार्गदर्शन में साइबर थाना के निरीक्षक नरेशकुमार सुतार और उनकी टीम मंगलवार को वर्धा पहुंची और कार्रवाई को अंजाम दिया। गिरफ्तारी के बाद काटोलकर को नागपुर लाकर अदालत में पेश किया गया।
इस मामले में अब तक एसआईटी ने विभागीय शिक्षा उपसंचालक, शिक्षाधिकारी, लिपिक, विभिन्न स्कूलों के प्रधानाध्यापक, स्कूल संचालक और सहायक शिक्षकों सहित कुल 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र भी दाखिल किया जा चुका है।
साइबर पुलिस के अनुसार, घोटाले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

