हिंगणा एमआईडीसी का घुट रहा दम

नागपुर। हिंगणा एमआईडीसी (MIDC) औद्योगिक क्षेत्र में रेडी मिक्स कंक्रीट (RMC) प्लांटों से फैल रहे प्रदूषण ने गंभीर रूप ले लिया है। लगातार उड़ती धूल, सीमेंट के कण, गंदा अपशिष्ट जल और नियमों की खुलेआम अनदेखी के चलते हिंगणा एमआईडीसी का दम घुटता नजर आ रहा है। हालात से परेशान उद्योग जगत, स्थानीय नागरिकों और श्रमिकों ने खतरे की घंटी बजाते हुए प्रशासन से तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है।

हिंगणा एमआईडीसी क्षेत्र में संचालित कई आरएमसी प्लांट पर्यावरणीय नियमों का पालन किए बिना काम कर रहे हैं। इन प्लांटों से निकलने वाली सीमेंट धूल हवा में घुलकर आसपास के उद्योगों, रिहायशी इलाकों और सड़कों पर फैल रही है। इसके कारण पूरे क्षेत्र में धुंध जैसी स्थिति बनी रहती है, जिससे दृश्यता कम होने के साथ-साथ स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ रहा है।

एमआईडीसी क्षेत्रों में संचालित रासायनिक, धातु, सीमेंट, पावर और अन्य भारी उद्योगों से निकलने वाला धुआं, दूषित जल और ठोस कचरा आसपास के इलाकों को प्रभावित कर रहा है। कई स्थानों पर हवा और पानी की गुणवत्ता तय मानकों से नीचे गिर चुकी है, जिससे स्थानीय नागरिकों और औद्योगिक श्रमिकों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

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सूत्रों के अनुसार, कई औद्योगिक इकाइयां बिना आवश्यक पर्यावरणीय स्वीकृति और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति के ही कार्यरत हैं। कुछ उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगाए गए उपकरण या तो बंद पड़े हैं या नाम मात्र के लिए संचालित किए जा रहे हैं। अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र (ईटीपी/एसटीपी) पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहे, जिसके चलते बिना उपचारित रसायनयुक्त पानी सीधे नालों, नदियों और भूजल में छोड़ा जा रहा है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास सांस संबंधी बीमारियां, आंखों में जलन, त्वचा रोग और एलर्जी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसके बावजूद शिकायतों के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि एमआईडीसी क्षेत्रों में निरीक्षण और निगरानी व्यवस्था बेहद कमजोर है। नियमित जांच के अभाव और सख्त दंडात्मक कार्रवाई न होने से उद्योग नियमों की अनदेखी करने से नहीं डरते। कई बार नोटिस जारी होने के बाद भी कार्रवाई कागजों तक ही सीमित रह जाती है।

इस बीच उद्योग संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने सरकार से मांग की है कि प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं। नियमों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों के लाइसेंस रद्द किए जाएं, नियमित और पारदर्शी निरीक्षण प्रणाली लागू की जाए तथा आधुनिक प्रदूषण नियंत्रण तकनीक को अनिवार्य किया जाए। साथ ही, प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों और श्रमिकों के स्वास्थ्य की नियमित जांच कराने की भी मांग की गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका असर केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उद्योगों की साख, निवेश और रोजगार पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए बिना टिकाऊ औद्योगिक प्रगति संभव नहीं है।

फिलहाल सभी की निगाहें सरकार और संबंधित विभागों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। उद्योग जगत का कहना है कि यदि तत्काल सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो एमआईडीसी क्षेत्र गंभीर पर्यावरणीय संकट की ओर बढ़ सकता है।

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