एकनाथ निमगड़े हत्याकांड: गैंगस्टर सेफलकिर को कोर्ट ने थमाया 1,500 पृष्ठों का चार्जशीट

नागपुर: शहर के प्रसिद्ध वास्तुकार एकनाथ निमगड़े की सनसनीखेज हत्या की लंबे समय से लंबित जांच में शुक्रवार को बड़ा कदम सामने आया। गैंगस्टर रणजीत हलके सेफलकिर को प्रोडक्शन वारंट के तहत JMFC कोर्ट में पेश किया गया। यह कार्रवाई तब हुई जब हाल ही में कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट खारिज करते हुए सेफलकिर और सह-आरोपी मोहसिन बदरुद्दीन अंसारी उर्फ राजा पॉप (नागपुर सेंट्रल जेल में बंद) के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने के निर्देश दिए।

सुनवाई के दौरान सेफलकिर को 1,500 पन्नों का विस्तृत चार्जशीट सौंपा गया। अब यह मामला सेशंस कोर्ट को सौंप दिया गया है, जहां जल्द ही ट्रायल की शुरुआत होगी।

एकनाथ निमगड़े, जो शहर के जाने-माने आर्किटेक्ट थे, को 6 सितंबर 2016 की सुबह लाल इमली चौक पर टहलते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बाइक पर आए दो हमलावरों ने उन पर फायरिंग की और मौके से फरार हो गए थे। इस दिन-दहाड़े हुए हत्याकांड ने नागपुर में डर का माहौल पैदा कर दिया था।

जांच के दौरान सीबीआई ने मोहसिन अंसारी को गिरफ्तार किया था, जिसे मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा का प्रोफेशनल कॉन्ट्रैक्ट किलर बताया गया। उसके साथ उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ निवासी मोहम्मद परवेज को भी हमले में शामिल माना गया। कई महीनों तक मामला अनसुलझा रहने पर एजेंसी ने महत्वपूर्ण जानकारी के लिए 5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।

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पुलिस को संदेह है कि हत्या के पीछे लगभग 200 करोड़ रुपये मूल्य की एक विवादित जमीन थी, जो कथित रूप से निमगड़े की थी। जांचकर्ताओं के मुताबिक, निमगड़े को खत्म करने का 5 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट सेफलकिर को दिया गया था, जिसमें से 1.20 करोड़ रुपये अग्रिम मिले थे। सेफलकिर ने यह काम शरद उर्फ कालू हाते को सौंपा, जिसने फिर नवाब उर्फ छोटे साहब अशरफ़ी (नुब्‍बू) से संपर्क किया। नुब्बू के देरी करने पर कालू ने उसे धमकाया, जिसके बाद नुब्बू ने एक टीम तैयार की जिसमें राजा पॉप, परवेज समेत अन्य शामिल थे।

JMFC कोर्ट ने सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट खारिज करते हुए कहा कि मामले में पर्याप्त सामग्री मौजूद है, जो राजा पॉप और सेफलकिर की सीधी संलिप्तता दर्शाती है।

यह केस पहले नागपुर पुलिस और फिर क्राइम ब्रांच ने संभाला था। बाद में निमगड़े के बेटे द्वारा धीमी जांच का आरोप लगाते हुए दायर याचिका पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने केस को सीबीआई को सौंप दिया। कोर्ट में सेफलकिर की ओर से एडवोकेट प्रकाश जायसवाल ने पक्ष रखा।

अब आगे की सुनवाई सेशंस कोर्ट में होगी।

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