श्रीमान नारायण नारायण हरि हरि

श्रीमान नारायण नारायण हरि हरि श्रीमान नारायण नारायण हरि हरि नारायण नारायण हरि हरि नारायण नारायण हरि हरि ॥

अंतरा १ लक्ष्मी पति कमल नयन, शेष शय्या पर सोए गरुड़ वाहन चक्रधारी, पीताम्बर धारी मोहे शंख चक्र गदा पद्म, चार भुजाएँ सुहावनि भक्तों के संकट हर लो, दर्शन दो भगवन श्रीमान नारायण नारायण हरि हरि…

अंतरा २ क्षीर सागर में शयन करो, अनंत शेष की शय्या पर लक्ष्मी जी चरण दबावें, नारद मुनि गावें हरि चरित्र अपार ब्रह्मा जी वेद पढ़ावें, शिव जी ध्यान लगावें देवता सब आरती उतारें, जय जयकार करें श्रीमान नारायण नारायण हरि हरि…

अंतरा ३ मत्स्य कूर्म वराह नरसिंह, वामन परशुराम राम कृष्ण बुद्ध कल्कि, दस अवतार तुम्हारे रावण का घमंड चूर किया, कंस का मर्दन किया भक्त प्रहलाद को बचाया, द्रौपदी की लाज बचाई श्रीमान नारायण नारायण हरि हरि…

अंतरा ४ जो नर इस भजन को गावे, सत्यनारायण कथा सुनावे एकादशी का व्रत रखे, मन से भाव लगावे उसके घर में सुख-शांति आवे, धन-धान्य की बरसात हो सारे पाप कट जाएँ, वैकुंठ धाम को जगह मिल जाए श्रीमान नारायण नारायण हरि हरि…

अंतिम तेज़ भाग (कीर्तन में सब नाचते हैं) हरि नारायण… हरि नारायण… हरि नारायण… हरि हरि हरि नारायण… हरि नारायण… हरि नारायण… हरि हरि श्रीमान नारायण नारायण हरि हरि श्रीमान नारायण नारायण हरि हरि ॥

जयकारे (अंत में जोर-जोर से)

  • जय लक्ष्मी नारायण !
  • जय श्रीमन नारायण !
  • जय जय श्री सत्यनारायण भगवान !
  • ॐ नमो नारायण ! ॐ नमो भगवते वासुदेवाय !
  • हरि बोल हरि बोल, सत्यनारायण भगवान की जय !

इस भजन को गाते ही घर में सकारात्मक ऊर्जा और लक्ष्मी कृपा बरसती है। हर महीने की एकादशी और पूर्णिमा को सत्यनारायण कथा के साथ अवश्य गाएं।

ॐ नमो नारायण 🙏🪔✨🌸

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