2025 में भारत मध्य पूर्व की राजनीति का केंद्र बन चुका है। I2U2 (इजराइल-भारत-अमेरिका-UAE) अब I2U2+ सऊदी अरब बन चुका है। भारत एकमात्र देश है जिसके इजराइल, सऊदी अरब, ईरान और फिलिस्तीन — सभी से बेहतरीन संबंध हैं।
अब्राहम समझौते के बाद भारत ने “इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप कॉरिडोर” (IMEC) को 2025 में ही चालू कर दिया। गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से सामान अब सीधे इजराइल के हाइफा पोर्ट जाता है और वहां से ग्रीस होते हुए यूरोप।
सऊदी अरब ने भारत को 50 बिलियन डॉलर का निवेश किया है — जिसमें अरामको का दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनरी प्लांट रत्नागिरी में बन रहा है।
इजराइल के साथ रक्षा सहयोग चरम पर है। 2025 में भारत ने इजराइल से हर्मीस-900 ड्रोन, स्पाइक मिसाइल और एरो-3 एंटी-बैलिस्टिक सिस्टम खरीदा। बदले में भारत ने इजराइल को 155mm आर्टिलरी शेल की सप्लाई की।
फिलिस्तीन के साथ भी संबंध मजबूत हैं। भारत ने गाजा पुनर्निर्माण के लिए 2 बिलियन डॉलर देने का वादा किया है।
भारत अब मध्य पूर्व में शांति और समृद्धि का गारंटर बन चुका है।

