जलवायु परिवर्तन 2025: भारत ने कैसे वैश्विक नेतृत्व अपने हाथ में ले लिया

नवंबर 2025 में COP30 ब्राजील में संपन्न हुआ और दुनिया ने पहली बार देखा कि जलवायु परिवर्तन की बातचीत का केंद्र अब अमेरिका-यूरोप नहीं, भारत है। भारत ने “मिशन LiFE” को वैश्विक आंदोलन बना दिया। 118 देशों ने आधिकारिक तौर पर LiFE (Lifestyle for Environment) को अपनी राष्ट्रीय नीति में शामिल कर लिया है।

भारत ने 2025 में अपना नया NDC (Nationally Determined Contribution) पेश किया जिसमें 2030 तक 50% ऊर्जा नवीकरणीय स्रोतों से और 45% उत्सर्जन तीव्रता में कमी का लक्ष्य रखा गया है — जो पहले के लक्ष्य से भी ज्यादा महत्वाकांक्षी है। सबसे बड़ी बात — भारत यह लक्ष्य पहले ही 2027 तक हासिल कर लेगा। सौर ऊर्जा में भारत की स्थापित क्षमता 2025 में 300 GW को पार कर गई है — दुनिया में नंबर-1। पवन ऊर्जा 120 GW, ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन 5 मिलियन टन प्रतिवर्ष शुरू हो चुका है।

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) अब 120 सदस्य देशों वाला संगठन है और इसका मुख्यालय गुरुग्राम में है। 2025 में ISA ने “ग्लोबल सोलर ग्रिड” प्रोजेक्ट शुरू किया जिसमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और मध्य-पूर्व को अंडर-सी केबल से जोड़ा जा रहा है ताकि सूर्य कभी न डूबे।

भारत ने विकसित देशों को खुली चुनौती दी — “जो 100 साल से प्रदूषण कर रहे हैं, वे 100 बिलियन डॉलर प्रतिवर्ष जलवायु वित्त क्यों नहीं दे रहे?” 2025 में पहली बार भारत के नेतृत्व में “लॉस एंड डैमेज फंड” में 1.2 ट्रिलियन डॉलर जमा करने का समझौता हुआ। जिसमें अमेरिका-यूरोप ने 800 बिलियन और चीन ने 150 बिलियन देने का वादा किया।

भारत ने “कोलिशन फॉर डिजास्टर रेसिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर” (CDRI) को इतना मजबूत बना दिया कि अब 45 देश इसके सदस्य हैं। 2025 में तूफान मिचांग और मध्य एशिया बाढ़ के बाद भारत ने 48 घंटे में 12 देशों में राहत पहुंचाई।

2025 में भारत दुनिया का एकमात्र बड़ा देश है जिसने कार्बन उत्सर्जन में निरपेक्ष वृद्धि रोक दी है। हम विकास भी कर रहे हैं और उत्सर्जन भी कम कर रहे हैं। यही कारण है कि ग्रेटा थनबर्ग से लेकर अंटोनियो गुटेरेस तक सब भारत की तारीफ कर रहे हैं।

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