नागपुर, 31 अक्टूबर 2026: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के नागपुर कार्यालय ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बिल्डर शशांक गोविंदप्रसाद पांडेय, प्रोपराइटर प्रयाग डेवलपर्स एंड बिल्डर्स से जुड़े नागपुर जिले के दो ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई 26 अक्टूबर को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई।
छापेमारी के दौरान ED ने 1.95 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी, आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं। इसके अलावा 40 लाख रुपये से अधिक की बैंक जमा राशि फ्रीज की गई है। जांच एजेंसी ने अपराध से अर्जित धन से खरीदी गई होने के संदेह में कई अचल संपत्तियों की भी पहचान की है।
वरिष्ठ नागरिक विधवा से 9.4 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी
ED की जांच के अनुसार, शशांक पांडेय ने एक वरिष्ठ नागरिक विधवा के साथ विकास समझौता किया था। आरोप है कि जमीन के विकास अधिकारों के बदले उन्हें 1.75 करोड़ रुपये और 14 आवासीय फ्लैट देने का आश्वासन दिया गया था।
जांच में आरोप लगाया गया है कि संबंधित घोषणा-पत्र (डिक्लेरेशन डीड) रद्द किए जाने के बाद महिला के हिस्से के लिए निर्धारित फ्लैट उनकी जानकारी और सहमति के बिना तीसरे पक्ष को बेच दिए गए।
इन फ्लैटों की बिक्री से प्राप्त 8.93 करोड़ रुपये कथित तौर पर हड़प लिए गए, जबकि 45 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि भी महिला को नहीं दी गई। ED के मुताबिक, इस पूरे मामले में कथित नुकसान 9.4 करोड़ रुपये का है।
बंधक रखे 22 फ्लैट बेचने का भी आरोप
जांच में दिव्या प्रयाग अपार्टमेंट से जुड़ा एक अन्य मामला भी सामने आया है। ED के अनुसार, इस परियोजना के 22 फ्लैट दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (DHFL) के पास बंधक रखे गए थे।
इन फ्लैटों को बंधक रखकर परियोजना के लिए 22 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया था, जिसमें से 11 करोड़ रुपये जारी किए गए थे।
आरोप है कि पांडेय ने ऋणदाता की अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) प्राप्त किए बिना और खरीदारों को फ्लैटों पर पहले से मौजूद बंधक की जानकारी दिए बिना उनकी बिक्री कर दी।
बैंक में कथित तौर पर झूठा शपथपत्र जमा किया
ED की जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि बिल्डर ने फ्लैटों पर मौजूद बंधक की जानकारी छिपाते हुए बैंक में कथित रूप से गलत शपथपत्र प्रस्तुत किया था।
इस मामले में बकाया राशि बढ़कर 12.84 करोड़ रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई है। इसके बाद संबंधित संपत्तियों के खिलाफ SARFAESI अधिनियम के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।
अजनी और राणाप्रतापनगर थानों में दर्ज FIR से शुरू हुई जांच
ED की यह जांच नागपुर के अजनी और राणाप्रतापनगर पुलिस थानों में दर्ज प्राथमिकी (FIR) के आधार पर शुरू हुई थी। इन मामलों में भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 418 और 420 के तहत आरोप दर्ज किए गए थे।
आगे की जांच जारी, आरोपों पर कानूनी प्रक्रिया के बाद होगा फैसला
ED की कार्रवाई में नकदी, दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं। साथ ही बैंक खातों में जमा राशि फ्रीज करने और संदिग्ध अचल संपत्तियों की पहचान के बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया है।
फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है। शशांक पांडेय के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच का हिस्सा हैं और इन पर अंतिम निर्णय कानूनी कार्यवाही के बाद ही होगा।

