RTO का ‘तीसरा नेत्र’: मोटर वाहन निरीक्षकों को मिले बॉडी कैमरे, जांच की पूरी प्रक्रिया होगी रिकॉर्ड

नागपुर के तीनों आरटीओ कार्यालयों को 25 बॉडी कैमरे

सड़क पर वाहन जांच के दौरान होने वाले विवाद, अनियमितता और रिश्वतखोरी के आरोपों पर अंकुश लगाने के लिए परिवहन विभाग ने आरटीओ के वायुवेग दलों को बॉडी वियर कैमरे उपलब्ध कराए हैं। नागपुर के तीनों आरटीओ कार्यालयों को कुल 25 अत्याधुनिक कैमरे मिले हैं।

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शहर और ग्रामीण आरटीओ को 10-10 कैमरे

परिवहन विभाग ने नागपुर शहर आरटीओ और नागपुर ग्रामीण आरटीओ को 10-10, जबकि पूर्व नागपुर उपप्रादेशिक परिवहन कार्यालय को 5 कैमरे दिए हैं।

वाहन जांच से चालान तक सब कुछ रिकॉर्ड होगा

बॉडी कैमरे से वाहन रोकने से लेकर दंडात्मक रसीद जारी करने तक की पूरी प्रक्रिया ऑडियो-वीडियो के रूप में रिकॉर्ड होगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि जांच दल ने नियमानुसार कार्रवाई की या नहीं और वाहन चालक ने सहयोग किया या विवाद किया।

कौन कर सकेगा कैमरे का इस्तेमाल?

सड़क पर प्रत्यक्ष वाहन जांच करने वाले मोटर वाहन निरीक्षक और सहायक मोटर वाहन निरीक्षक इन कैमरों का इस्तेमाल कर सकेंगे। नाकाबंदी या वाहन जांच के दौरान कार्रवाई दर्ज करने वाले वायुवेग दल के जिम्मेदार अधिकारी के लिए ड्यूटी के दौरान कैमरा पहनना अनिवार्य होगा। कार्यालय या डेस्क ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को इसका इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी।

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विवाद की स्थिति में फुटेज बनेगा महत्वपूर्ण सबूत

बॉडी कैमरे में अधिकारियों और वाहन चालकों के बीच होने वाली बातचीत भी रिकॉर्ड होगी। जांच के दौरान विवाद, गलत आरोप या दुर्व्यवहार की स्थिति में फुटेज के आधार पर वास्तविक स्थिति की जांच की जा सकेगी। जरूरत पड़ने पर यह रिकॉर्ड कानूनी कार्रवाई में आधिकारिक सबूत के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

नियमित इस्तेमाल नहीं होने पर परिवहन आयुक्त सख्त

सभी मोटर वाहन निरीक्षकों द्वारा कैमरों का नियमित इस्तेमाल नहीं किए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद परिवहन आयुक्त ने सभी आरटीओ को कैमरों के इस्तेमाल की रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। नागपुर ग्रामीण आरटीओ को मुख्यालय से 10 बॉडी वियर कैमरे मिले हैं और कर्मचारियों को इनके उपयोग की प्राथमिक जानकारी दी गई है।

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हाई-डेफिनिशन रिकॉर्डिंग और जीपीएस जैसी सुविधाएं

इन अत्याधुनिक बॉडी कैमरों में हाई-डेफिनिशन रिकॉर्डिंग, नाइट विजन, लंबी बैटरी क्षमता, जीपीएस ट्रैकिंग और छेड़छाड़ से सुरक्षित रिकॉर्डिंग जैसी सुविधाएं हैं। इससे सड़क पर होने वाली आरटीओ की कार्रवाई में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।

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