घटना का विवरण
नागपुर जिले में स्थित कोराडी और खापरखेड़ा थर्मल पावर प्लांट की राख (फ्लाई ऐश) के कारण आसपास के 21 गांवों की स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हो गई है। यह समस्या वर्षों से बनी हुई है, लेकिन इसके स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
राख से बढ़ता पर्यावरणीय संकट
थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली फ्लाई ऐश (राख) आसपास के गांवों के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। यह राख:
- जल स्रोतों में मिलकर भूजल को प्रदूषित कर रही है
- बोअरवेल और कुओं का पानी असुरक्षित बना रही है
- हवा में फैलकर घरों, वाहनों और खेतों पर जम रही है
- फसलों पर चिपककर कृषि उत्पादन को नुकसान पहुंचा रही है
बरसात के मौसम में यह राख बहकर खेतों और जल स्रोतों में फैल जाती है, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।
21 गांवों पर व्यापक असर
सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, प्रभावित 21 गांवों में से:
- 14 गांवों में जल स्रोत गंभीर रूप से प्रदूषित पाए गए
- कई गांवों में खेती की भूमि प्रभावित हुई
- आसपास के क्षेत्रों में भी इसका असर फैलता जा रहा है
स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव
फ्लाई ऐश प्रदूषण के कारण ग्रामीणों में कई गंभीर बीमारियाँ बढ़ रही हैं:
- श्वसन संबंधी रोग जैसे अस्थमा और ब्रोंकाइटिस
- लगातार खांसी, जुकाम और गले में संक्रमण
- आंखों में जलन और संक्रमण
- त्वचा संबंधी रोग
- गर्भवती महिलाओं और बच्चों में स्वास्थ्य जटिलताएँ
- किडनी संबंधी समस्याओं में वृद्धि
इसके अलावा, पशुओं पर भी इसका गंभीर असर देखा गया है, जिससे दूध उत्पादन में गिरावट आई है।
प्रदूषण का व्यापक फैलाव
यह प्रदूषण केवल गांवों तक सीमित नहीं रहा। नागपुर शहर के बाहरी क्षेत्रों जैसे:
- नारी झोपड़पट्टी
- उप्पलवाड़ी
- नारा
- मानकापुर
- पागलखाना चौक
- सुगतनगर
- समतानगर
- तक्षशिलानगर
- झिंगाबाई टाकली
- गोधनी
- शंभूनगर
में भी इसका प्रभाव देखा जा रहा है।
प्रशासनिक लापरवाही और समितियों की निष्क्रियता
पर्यावरण मंत्रालय के निर्देश पर बनाई गई निगरानी समिति (सर्विलांस कमेटी) की स्थापना के बावजूद पिछले डेढ़ वर्ष से कोई बैठक नहीं हुई है। इससे समस्या के समाधान की प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ी हुई है।
राख में पाए गए खतरनाक तत्व
प्रयोगशाला परीक्षणों में फ्लाई ऐश में कई विषैले और भारी धातु तत्व पाए गए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- आर्सेनिक
- कैडमियम
- क्रोमियम
- लेड
- मरकरी
- निकेल
- जिंक
- फ्लोराइड
ये तत्व मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए अत्यंत खतरनाक माने जाते हैं।
निष्कर्ष
कोराडी और खापरखेड़ा की फ्लाई ऐश समस्या अब केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं रही, बल्कि यह एक गंभीर स्वास्थ्य और जीवन संकट बन चुकी है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।

