मां के पहले स्पर्श से पहले ही अनाथ हुआ नवजात, डॉक्टरों और नर्सों ने संभाली जीवन की डोर

जन्म के बाद आई अस्पताल से हुई लापता, मेडिकल स्टाफ बना परिवार

नागपुर : मां की गोद, उसका स्पर्श और उसकी ममता हर नवजात शिशु का पहला अधिकार होता है। लेकिन नागपुर के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (मेडिकल) में जन्मे एक नवजात के हिस्से यह सुख नहीं आया। जन्म के कुछ ही समय बाद उसकी मां अस्पताल से लापता हो गई, जबकि नवजात शिशु नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा था।

मां का चेहरा ठीक से देख पाने से पहले ही यह मासूम अनाथ हो गया। हालांकि, मेडिकल के डॉक्टरों, नर्सों, समाजसेवियों और पुलिस अधिकारियों ने इस नवजात को अकेला नहीं छोड़ा और उसके लिए नए जीवन की राह तैयार की।

  • Save

प्रेम संबंध, गर्भावस्था और फिर अकेलापन

जानकारी के अनुसार, 17 वर्षीय किशोरी प्रेम संबंध में थी और भविष्य के सपने संजो रही थी। इसी दौरान उसके गर्भवती होने का पता चला। गर्भावस्था की जानकारी मिलते ही संबंधित युवक ने उसका साथ छोड़ दिया।

स्थिति ऐसी बन गई कि किशोरी के पास न तो कोई सहारा था और न ही कोई रास्ता। समय बीतता गया और गर्भपात की कानूनी अवधि भी समाप्त हो गई। आखिरकार प्रसव पीड़ा शुरू होने पर उसे मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसने एक स्वस्थ दिखने वाले लेकिन कमजोर नवजात को जन्म दिया।

नवजात को एनआईसीयू में भर्ती करना पड़ा

जन्म के बाद शिशु की स्थिति नाजुक होने के कारण उसे तुरंत नवजात गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती किया गया। इसी बीच उसकी मां अचानक अस्पताल से लापता हो गई।

घटना की जानकारी मिलते ही चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अविनाश गावंडे के मार्गदर्शन में सामाजिक अधीक्षक हरीश गजबे ने अजनी पुलिस की सहायता से युवती की तलाश शुरू करवाई। महिला पुलिस कर्मी रुक्सार शेख और उषा खरात को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई।

जांच में सामने आई चौंकाने वाली जानकारी

  • Save

पुलिस जांच में पता चला कि युवती मध्य प्रदेश के सिवनी जिले की निवासी है और उसने अस्पताल में फर्जी नाम से पंजीकरण कराया था।

जांच में यह भी सामने आया कि वह जुलाई 2025 में गर्भवती हुई थी। उस समय उसकी आयु मात्र 17 वर्ष थी। इस आधार पर सिवनी पुलिस ने संबंधित युवक के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।

फिलहाल युवती का कोई पता नहीं चल पाया है और उसकी तलाश जारी है।

मेडिकल अस्पताल ही बना मासूम का परिवार

इस दौरान मेडिकल अस्पताल का पूरा स्टाफ नवजात के लिए परिवार बन गया। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष तिवारी, डॉ. संदीप मानवटकर, डॉ. नंदिनी कुमरे, डॉ. लावण्या शर्मा, प्रभारी नर्स आरती अत्राम तथा उनकी टीम ने चिकित्सा सेवा के साथ-साथ उसे स्नेह और देखभाल भी प्रदान की।

दत्तक संस्था में भेजने की तैयारी

मेडिकल प्रशासन ने बाल संरक्षण विभाग, महिला एवं बाल कल्याण समिति, चाइल्डलाइन और अजनी पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर नवजात को मान्यता प्राप्त दत्तक संस्था में भेजने का निर्णय लिया है।

मासूम को अब नए परिवार का इंतजार

  • Save

अस्पताल के अधिष्ठाता डॉ. राज गजभिये और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अविनाश गावंडे लगातार बच्चे के स्वास्थ्य और भविष्य पर नजर बनाए हुए हैं।

डॉ. गावंडे ने कहा कि जन्म के पहले ही दिन जीवन की कठिन परीक्षा से गुजरने वाले इस मासूम को अब एक नए घर, नए परिवार और नए स्नेह की प्रतीक्षा है। उसके जीवन की अगली शुरुआत प्यार, सुरक्षा और अपनापन देने वाले परिवार के साथ हो, यही सभी की कामना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share via
Copy link