उमरेड ट्रॉमा केयर सेंटर में लापरवाही का बड़ा मामला, दो हफ्तों से खराब पड़ी है शवपेटी
उमरेड : अस्पतालों में किसी मरीज की मौत होने के बाद आमतौर पर शव को तुरंत परिजनों के हवाले करने या पोस्टमार्टम के लिए शवगृह भेजने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। लेकिन नागपुर जिले के उमरेड ट्रॉमा केयर सेंटर से बेहद अमानवीय और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां मरीजों के वार्ड में ही शव को घंटों तक रखा जा रहा है, जिससे अन्य मरीजों और उनके परिजनों में डर और बेचैनी का माहौल बना हुआ है।
जानकारी के मुताबिक, मरीजों को उसी वार्ड में रातभर रुकना पड़ रहा है जहां उनके बगल वाले बेड पर मृतदेह रखा गया था। इस घटना ने अस्पताल प्रशासन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रातभर बेड के पास पड़ा रहा शव
शंकर सीताराम सिंदूरकर (70), निवासी रुयाड, तहसील कुही, शुक्रवार को एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए कावरापेठ, उमरेड पहुंचे थे। भोजन करने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और बाद में उनकी मौत हो गई। इसके बाद उनका शव ट्रॉमा केयर सेंटर के भर्ती वार्ड में ही रातभर और अगले दिन दोपहर 12 बजे तक रखा गया।
इस दौरान उसी वार्ड में भर्ती अन्य मरीजों को शव के पास ही समय बिताना पड़ा, जिससे कई लोग मानसिक रूप से परेशान और भयभीत हो गए।
शवपेटी खराब होने से बढ़ी समस्या
मामले की जांच में सामने आया कि उमरेड ग्रामीण अस्पताल की मर्चुरी में शव सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली शवपेटी पिछले दो सप्ताह से खराब पड़ी है।
पहले अस्पताल में एक शवपेटी थी, लेकिन कुछ महीने पहले उसमें आग लगने से वह पूरी तरह खराब हो गई। इसके बाद करीब छह महीने पहले पाटणसावंगी से दूसरी शवपेटी लाई गई थी, लेकिन वह भी अब खराब अवस्था में पड़ी हुई है।
अस्पताल प्रशासन पर उठे सवाल
अस्पताल में शव रखने जैसी बुनियादी व्यवस्था ठप होने के बावजूद प्रशासन द्वारा समय पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ऐसे में मरीजों और उनके परिजनों को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

