महाराष्ट्र के नागपुर जिले के भिवापुर तहसील स्थित धामणगांव गांव में शनिवार शाम ऐसा दर्दनाक अग्निकांड हुआ, जिसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया। शाम करीब 6:30 बजे अचानक लगी आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप ले लिया और देखते ही देखते गांव के दर्जनों घर आग की लपटों में घिर गए। इस हादसे में करीब 40 से 50 घर पूरी तरह जलकर राख हो गए, कई मवेशियों की मौत हो गई और लगभग 700 से 800 लोग बेघर हो गए।
कैसे शुरू हुई इतनी बड़ी तबाही?
प्रारंभिक जांच और स्थानीय लोगों के मुताबिक, गांव के पास खेत में कचरा या सूखी घास जलाई गई थी। दिनभर भीषण गर्मी के बाद शाम को अचानक तेज धूल भरी आंधी चली। इसी दौरान आग की चिंगारी तेज हवाओं के साथ गांव की ओर पहुंची और एक घर में आग लग गई। गर्म मौसम, सूखी घास और एक-दूसरे से सटे कच्चे घरों की वजह से आग ने कुछ ही मिनटों में पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया।
कुछ अधिकारियों ने शॉर्ट सर्किट या बिजली का तार गिरने की आशंका भी जताई है। फिलहाल प्रशासन ने आग के असली कारण की जांच शुरू कर दी है और फॉरेंसिक टीम को भी लगाया गया है।
गांव में मचा चीख-पुकार का माहौल
आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। ग्रामीण जान बचाने के लिए घरों से बाहर भागने लगे। कोई बच्चों को लेकर भागा, तो कोई बुजुर्गों को संभालता नजर आया। कई लोग अपने घरों से सिर्फ वही सामान निकाल पाए जो हाथ में आ गया। बाकी सब कुछ आग में जल गया।
ग्रामीणों ने बाल्टियों और पाइप से पानी डालकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तेज हवाओं के सामने उनकी कोशिशें बेअसर साबित हुईं। आग इतनी भयानक थी कि कई मवेशी गोठों में ही जिंदा जल गए। बाइक, साइकिल, ऑटो और घरों में रखा अनाज भी राख हो गया।
दमकल विभाग की घंटों की मशक्कत
घटना की जानकारी मिलते ही भिवापुर, उमरेड, नागपुर, चिमूर, ब्रह्मपुरी और चंद्रपुर समेत कई इलाकों से दमकल की गाड़ियां मौके पर भेजी गईं। करीब 8 फायर टेंडर आग बुझाने में जुटे। संकरी गलियों और तेज हवा की वजह से राहत कार्य में काफी दिक्कतें आईं।
दमकल कर्मियों और स्थानीय लोगों ने घंटों की मेहनत के बाद देर रात आग पर काबू पाया। तब तक गांव का बड़ा हिस्सा जल चुका था। कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए।
प्रशासन और राहत कार्य
नागपुर जिला प्रशासन, पुलिस अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि तुरंत मौके पर पहुंचे। प्रभावित परिवारों को अस्थायी राहत शिविरों में शिफ्ट किया गया है, जहां खाने-पीने और रहने की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन अब नुकसान का आकलन कर रहा है और पीड़ितों को मुआवजा देने की तैयारी की जा रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक एक बुजुर्ग व्यक्ति घायल हुआ है, लेकिन अब उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। कुछ स्थानीय और सोशल मीडिया रिपोर्ट्स में 2-3 लोगों की मौत की आशंका जताई गई, हालांकि प्रशासन ने अब तक किसी मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
एक सवाल जो सबके मन में है…
क्या यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना थी, या लापरवाही की वजह से पूरा गांव जल गया?
धामणगांव की यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि गर्मी, तेज हवाएं और छोटी सी लापरवाही मिलकर कितनी बड़ी तबाही ला सकती हैं। गांव के जिन परिवारों ने सालों मेहनत करके अपना घर बनाया था, आज उनके पास सिर्फ राख बची है।

