नागपुर: महाराष्ट्र के नागपुर जिले के सावनेर तहसील के बडेगांव क्षेत्र में स्थित खेकरा नाला जलाशय से मिट्टी की खुदाई को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि प्रशासन द्वारा दी गई अनुमति से कई गुना अधिक मिट्टी का अवैध उत्खनन किया गया, जिससे स्थानीय स्तर पर आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
राजस्व विभाग ने इस जलाशय से केवल 500 ब्रास मिट्टी निकालने की अनुमति दी थी, लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि यहां कम से कम 5000 ब्रास मिट्टी का उत्खनन किया जा चुका है। इस पूरे काम में जेसीबी और पोकलेन मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है और मिट्टी को बड़े पैमाने पर ट्रांसपोर्ट कर ईंट निर्माण के लिए उपयोग किया जा रहा है।
यह जलाशय पाटबंधारे विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है, और उनके अनापत्ति प्रमाणपत्र के बाद ही यह अनुमति दी गई थी। संबंधित व्यक्तियों को 30 दिनों की समयसीमा दी गई थी, जिसमें उन्हें 18 मार्च से 18 अप्रैल तक काम पूरा करना था। बावजूद इसके, तय सीमा से अधिक खुदाई होने के आरोप सामने आए हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि इस पूरे मामले की जानकारी स्थानीय पुलिस, राजस्व निरीक्षक और ग्राम स्तर के अधिकारियों को होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शेती की बजाय ईंट उद्योग को प्राथमिकता
जलाशय की गादयुक्त मिट्टी में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटैशियम और जैविक कार्बन की मात्रा अधिक होती है, जो खेती के लिए बेहद उपयोगी मानी जाती है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है और उत्पादन बढ़ता है।
इसके बावजूद यह मिट्टी किसानों को देने के बजाय ईंट निर्माण के लिए बेची जा रही है, जिससे किसानों में नाराजगी है।
किसानों की मांग को किया गया नजरअंदाज
स्थानीय किसानों ने कई बार प्रशासन से मांग की कि यह मिट्टी उन्हें मुफ्त में खेतों में डालने के लिए दी जाए, लेकिन अधिकारियों ने उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया। उल्टा, किसानों का आरोप है कि इस मिट्टी को ऊंचे दामों में बेचा गया, जिससे भ्रष्टाचार की आशंका और गहरा गई है।
माप और जांच की उठी मांग
नियमों के अनुसार, यदि तय सीमा से अधिक खुदाई होती है तो पाटबंधारे विभाग को काम रोकने का अधिकार होता है, लेकिन इसके लिए पहले राजस्व विभाग को सूचित करना जरूरी होता है।
अब किसानों ने मांग की है कि वरिष्ठ अधिकारी मौके पर माप करवाएं और वास्तविक उत्खनन की मात्रा का पता लगाएं। साथ ही यदि अनियमितता साबित होती है तो दोषियों और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
टेंभूरडोह में कार्रवाई, यहां चुप्पी क्यों
इसी क्षेत्र के टेंभूरडोह शिवार में भी 500 ब्रास मिट्टी की अनुमति दी गई थी, लेकिन वहां जब अधिकारी माप के लिए पहुंचे तो खुदाई को तुरंत बंद करवा दिया गया।
अब सवाल उठ रहा है कि एक ही विभाग द्वारा अलग-अलग जगहों पर अलग रवैया क्यों अपनाया जा रहा है, और खेकरा नाला मामले में कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
इस पूरे प्रकरण ने राजस्व, पाटबंधारे और पुलिस विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, और स्थानीय लोग अब पारदर्शी जांच और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

