नागपुर में बढ़ते बिजली बिल को लेकर लोगों के बीच स्मार्ट मीटर को दोष देने की चर्चा तेज हो गई है। लेकिन महावितरण (MSEDCL) ने इस पर सफाई देते हुए कहा है कि सिर्फ स्मार्ट मीटर जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि इसके पीछे घर की तकनीकी खराबियां भी बड़ी वजह हो सकती हैं।
बढ़े हुए बिल का असली कारण क्या है
महावितरण अधिकारियों के अनुसार, कई मामलों में घर की वायरिंग में खराबी, खासकर अर्थिंग (Earthing) या न्यूट्रल लीकेज, बिजली खपत को बढ़ा देती है। इससे मीटर ज्यादा यूनिट रिकॉर्ड करता है और बिल बढ़ जाता है।
अर्थिंग खराब होने से कैसे बढ़ता है बिल
जब घर की अर्थिंग सही नहीं होती, तो करंट का कुछ हिस्सा लीकेज के रूप में बहता रहता है।
इससे:
- मीटर लगातार अतिरिक्त यूनिट दर्ज करता है
- बिजली की खपत वास्तविक से ज्यादा दिखाई देती है
- उपभोक्ता को ज्यादा बिल भरना पड़ता है
स्मार्ट मीटर पर क्यों उठ रहे हैं सवाल
नागपुर और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जिसके बाद कई उपभोक्ताओं ने बिल बढ़ने की शिकायत की है।
हालांकि, विभाग का कहना है कि ये मीटर अधिक सटीक रीडिंग देते हैं, जिससे वास्तविक खपत सामने आती है।
महावितरण की उपभोक्ताओं को सलाह
महावितरण ने लोगों से अपील की है कि:
- सबसे पहले घर की वायरिंग और अर्थिंग की जांच कराएं
- किसी भी संदेह की स्थिति में इलेक्ट्रिकल एक्सपर्ट से निरीक्षण कराएं
- बिना जांच के स्मार्ट मीटर को दोष न दें
स्मार्ट मीटर के फायदे क्या हैं
- बिजली खपत की रियल-टाइम जानकारी मिलती है
- टाइम के अनुसार उपयोग कर बिल कम किया जा सकता है
- मैनुअल रीडिंग की गलती खत्म होती है
निष्कर्ष
बढ़ते बिजली बिल का कारण सिर्फ स्मार्ट मीटर नहीं, बल्कि कई बार घर की तकनीकी खराबियां होती हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे पहले अपने घर की अर्थिंग और वायरिंग की जांच जरूर कराएं, तभी सही कारण सामने आएगा।

