कामठी में अब गूंजेगी कानून की आवाज, अवैध लाउडस्पीकरों पर पुलिस की सख्त कार्रवाई

नागपुर जिले के कामठी क्षेत्र में अवैध लाउडस्पीकर और ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ पुलिस ने सख्त अभियान शुरू कर दिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद न्यू कामठी और ओल्ड कामठी पुलिस ने धार्मिक स्थलों पर लगे लाउडस्पीकरों को लेकर कार्रवाई तेज कर दी है। प्रशासन का कहना है कि अब धार्मिक आस्था के नाम पर कानून का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई कार्रवाई

बॉम्बे हाईकोर्ट के शोर प्रदूषण संबंधी निर्देशों के पालन में पुलिस ने धार्मिक संस्थानों को नोटिस जारी किए हैं। इसके साथ ही समुदाय के प्रमुख लोगों और शांति समिति के सदस्यों के साथ बैठकें भी की गईं, ताकि कानून का पालन हो और सामाजिक सौहार्द भी बना रहे।

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बिना लिखित अनुमति नहीं लग सकेगा लाउडस्पीकर

नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी धार्मिक स्थल पर लाउडस्पीकर या पब्लिक एड्रेस सिस्टम लगाने और चलाने के लिए संबंधित प्राधिकरण से पूर्व लिखित अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सात दिन के भीतर सभी अवैध लाउडस्पीकर हटाने होंगे, अन्यथा उन्हें जब्त कर लिया जाएगा और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

ऊंचाई और दिशा को लेकर भी बने सख्त नियम

प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि अनुमति मिलने के बाद भी 15 फीट से अधिक ऊंचाई पर लाउडस्पीकर नहीं लगाए जा सकेंगे, जब तक कि इसके लिए अलग से विशेष मंजूरी न हो। साथ ही, साउंड सिस्टम की दिशा परिसर के भीतर रखनी होगी, ताकि आवाज सड़क या आसपास के रिहायशी इलाकों की ओर न जाए।

न्यू कामठी में 55 लाउडस्पीकर स्वेच्छा से हटाए गए

न्यू कामठी पुलिस स्टेशन के निरीक्षक महेश अंधाले के अनुसार, उनके क्षेत्र में 63 धार्मिक स्थल आते हैं, जिनमें मंदिर, विहार, मस्जिद और मदरसे शामिल हैं। पुलिस द्वारा संवाद और समझाइश के बाद अब तक 55 लाउडस्पीकर स्वेच्छा से हटाए जा चुके हैं, जबकि बाकी भी जल्द हटाए जाने की संभावना है।

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ओल्ड कामठी में भी दो दर्जन से अधिक संस्थानों को नोटिस

वहीं ओल्ड कामठी पुलिस स्टेशन के निरीक्षक प्रशांत जुमाडे ने बताया कि उनके क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक धार्मिक संस्थानों को नोटिस दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि समुदाय का सहयोग मिलने से इस अभियान को लागू करना आसान हुआ है।

कानून और आस्था के बीच संतुलन बनाने की कोशिश

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह अभियान ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ शांतिपूर्ण धार्मिक आचरण सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रशासन का उद्देश्य किसी धर्म विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि कानूनी नियमों का समान रूप से पालन कराना है।

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