देश की राजनीति में एक दिलचस्प और दुर्लभ स्थिति बनने जा रही है। महाराष्ट्र के बारामती से जुड़े पवार परिवार के दो सदस्य—वरिष्ठ नेता शरद पवार और उनके पोते पार्थ पवार—एक साथ राज्यसभा के सदस्य बनने जा रहे हैं। इससे संसद में एक ही परिवार की दो पीढ़ियों की मौजूदगी चर्चा का विषय बन गई है।
महाराष्ट्र से राज्यसभा की 7 सीटों के लिए उतने ही उम्मीदवार मैदान में रहने के कारण चुनाव बिना मुकाबले के हो गया, जिसके चलते सभी उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। इन सात सदस्यों में पवार परिवार के दो सदस्य भी शामिल हैं, जिससे इसे राजनीतिक रूप से “बारामती का पवार पैटर्न” कहा जा रहा है।
राज्यसभा में पहली बार पोते के साथ पहुंचेंगे शरद पवार
शरद पवार इससे पहले भी कई बार संसद में रह चुके हैं और उनका राजनीतिक अनुभव लगभग छह दशक से अधिक का है। वे तीसरी बार राज्यसभा के लिए चुने गए हैं, जबकि पार्थ पवार पहली बार राज्यसभा के सदस्य बनने जा रहे हैं।
पवार परिवार की राजनीति में मजबूत पकड़
पवार परिवार का महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय से दबदबा रहा है।
- शरद पवार कई बार लोकसभा और विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं।
- उनकी बेटी सुप्रिया सुले बारामती से चार बार लोकसभा सांसद चुनी जा चुकी हैं।
- परिवार के अन्य सदस्य भी राज्य और केंद्र की राजनीति में सक्रिय हैं।
लगातार 60 साल से संसद और विधानसभा में प्रतिनिधित्व
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, पिछले लगभग 60 वर्षों से पवार परिवार का कोई न कोई सदस्य संसद या विधानसभा में प्रतिनिधित्व करता रहा है। यही वजह है कि बारामती को पवार परिवार का मजबूत राजनीतिक गढ़ माना जाता है।
दुर्लभ राजनीतिक संयोग बना चर्चा का विषय
दादा और पोते का एक ही समय में संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) में होना भारतीय राजनीति में दुर्लभ उदाहरण माना जा रहा है। इससे महाराष्ट्र की राजनीति में पवार परिवार की प्रभावशाली मौजूदगी एक बार फिर चर्चा में आ गई है।

