एमईआरसी सुनवाई में फूटा गुस्सा: महावितरण पर मनमानी का आरोप

महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग (एमईआरसी) की जनसुनवाई मंगलवार को सदर स्थित जिला नियोजन भवन में हंगामेदार माहौल के बीच संपन्न हुई। करीब तीन घंटे चली इस सुनवाई में उद्योगपतियों, ऊर्जा विशेषज्ञों और उपभोक्ता संगठनों समेत 89 लोगों ने महावितरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। बिजली दरों में असमानता, अधिक बिलिंग और टैरिफ निर्धारण की प्रक्रिया को लेकर तीखी नाराजगी सामने आई।

उपस्थित लोगों ने महावितरण पर “तानाशाही रवैया” अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि खराब आपूर्ति के बावजूद उपभोक्ताओं से अधिक बिल वसूले जा रहे हैं। बहु-लाइसेंस प्रणाली को अनुमति नहीं दी जा रही, जिससे उपभोक्ता महंगी बिजली लेने को मजबूर हैं।

⚡ बिजली टैरिफ का खेल: 30 किमी में दो प्लांट, दाम में दोगुना अंतर

एमईआरसी की जनसुनवाई में महावितरण पर फूटा गुस्सा, टैरिफ शॉक रोकने की मांग
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🔎 असल मामला क्या है?

28 मार्च 2025 को एमईआरसी ने वर्ष 2025-30 के लिए बहुवर्षीय टैरिफ आदेश जारी करते हुए बिजली दरों में क्रमशः कमी का प्रावधान किया था। महावितरण ने इस आदेश के खिलाफ रिव्यू पिटीशन दाखिल की।

इसके बाद जून 2025 में आयोग ने नया आदेश जारी कर टैरिफ बढ़ा दिया, जिससे उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगा। इस फैसले को उपभोक्ता संगठनों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जनता की आपत्तियां सुनने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाए। इसी के तहत यह जनसुनवाई आयोजित की गई।

उपभोक्ताओं की मांग है कि:

  • 4 दिसंबर को दायर अतिरिक्त सबमिशन खारिज किए जाएं
  • 28 मार्च 2025 का मूल टैरिफ आदेश दोबारा लागू किया जाए
  • जुलाई से नवंबर 2025 के बीच वसूली गई अतिरिक्त राशि लौटाई जाए
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📊 30 किमी की दूरी, दाम में भारी अंतर

जनसुनवाई में उद्योगपति दीपक खांडेकर ने एक चौंकाने वाला उदाहरण रखा। उनके नरखेड़ (महाराष्ट्र) और पांढुर्णा (मध्य प्रदेश) में स्थित प्लांटों के बीच दूरी महज 30 किलोमीटर है।

  • मध्य प्रदेश में बिजली दर: ₹6.50 प्रति यूनिट
  • महाराष्ट्र में बिजली दर: ₹11 प्रति यूनिट तक

उन्होंने कहा कि इस अंतर के कारण महाराष्ट्र स्थित प्लांट घाटे में चल रहा है। आरोप लगाया गया कि महावितरण द्वारा लगाए गए अतिरिक्त शुल्क और करों की वजह से यह असमानता पैदा हुई है।

☀ ग्रिड सपोर्ट चार्ज पर भी विवाद

सोलर इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधियों ने रूफटॉप सोलर उपभोक्ताओं पर प्रस्तावित “ग्रिड सपोर्ट चार्ज” का कड़ा विरोध किया। उनका कहना था कि 5000 मेगावाट क्षमता लक्ष्य पूरा होने का कोई ठोस डेटा महावितरण ने पेश नहीं किया है, फिर भी नया शुल्क लगाने की तैयारी की जा रही है।

ऊर्जा विशेषज्ञ सुधीर बुधे ने कहा कि देश के कई शहरों में बहु-लाइसेंस प्रणाली से उपभोक्ताओं को सस्ती और बेहतर सेवा मिल रही है, लेकिन विदर्भ में इसे लागू नहीं किया जा रहा। यदि प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, तो उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली का विकल्प मिलेगा।

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🏭 रिव्यू पिटीशन खारिज करने की मांग

वीआईए इंडस्ट्री फोरम के अध्यक्ष आर.बी. गोयनका ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महावितरण की रिव्यू पिटीशन ही गलत है और इसे खारिज किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा,
“28 मार्च 2025 का आदेश लागू किया जाए, जिसमें बिजली दरें कम की गई थीं। प्रतिस्पर्धा के लिए समानांतर लाइसेंस जरूरी है। महंगी बिजली उद्योगों की कमर तोड़ रही है।”

📌 आयोग ने दर्ज किए सभी सुझाव

एमईआरसी ने सभी आपत्तियों और सुझावों को रिकॉर्ड में लिया है। अब आयोग द्वारा अंतिम निर्णय का इंतजार है, जो लाखों उपभोक्ताओं और उद्योग जगत के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

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