हे कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥ हे कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥
अंतरा १
गोविंद हरे, गोपाल हरे मुरली मनोहर, नंदलाल हरे राधा वल्लभ, श्याम सुंदर हरे माखन चोर, गिरिधर हरे हे कृष्ण गोविंद हरे मुरारी…
अंतरा २
यमुना तट पर बंसी बजाई गोपियों के संग रास रचाई राधा जी ने प्रेम लगाई श्याम ने मोहन मुरली सुनाई हे कृष्ण गोविंद हरे मुरारी…
अंतरा ३
कंस चाणूर को मार गिराया कालीदह नाग को दबाया द्वारका में राज चलाया रुक्मिणी संग ब्याह रचाया हे कृष्ण गोविंद हरे मुरारी…
अंतरा ४
अर्जुन को गीता सुनाई महाभारत में धर्म बचाई द्रौपदी की लाज बचाई भक्तों के दुख तुरंत मिटाई हे कृष्ण गोविंद हरे मुरारी…
अंतरा ५
जय हो जय हो गिरिधर गोपाल जय हो जय हो नंदलाल राधे राधे बोल, गोविंद बोल श्याम सुंदर की जय-जयकार हे कृष्ण गोविंद हरे मुरारी…
अंतिम अंतरा
जो कोई इस भजन को गावे मन से भाव लगाकर नाच-गावे उसके घर में सदा बस जावे राधा-कृष्ण का प्यार बरसावे हे कृष्ण गोविंद हरे मुरारी हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥
जयकारे (अंत में जोर से)
- हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे
- जय श्री कृष्ण ! जय राधे-श्याम !
- जय नंदलाल ! जय मुरली मनोहर !
- वृन्दावन बिहारी लाल की जय !
ये भजन जितना गाओ, उतना ही मन शांत और आनंदित हो जाता है। सुबह-शाम, जन्माष्टमी, एकादशी या कभी भी गा सकते हो।
राधे राधे 🙏🦚✨🪔

