आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्टदलन रघुनाथ कला की ॥
जाके बल से गिरिवर काँपे, रोग-दोष जाके निकट न झाँके । अंजनि-पुत्र महा-बलदायी, संतन के प्रभु सदा सहायी ॥ आरती कीजै हनुमान लला की…
देवन के तुम हो पहरेदार, राम-दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे, सब सुख लहे तुम्हारी सरना । तुम रक्षक काहु को डर ना ॥ आरती कीजै हनुमान लला की…
लाय सजीवन लखन जियाए, श्री रघुबीर हरषि उर लाए । रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥ आरती कीजै हनुमान लला की…
सहस बदन तुम्हरो यश गावैं, अस कही श्रीपति कंठ लगावैं । संकट मोचन हनुमान छुड़ावैं, मन क्रम वचन ध्यान जो लावैं ॥ आरती कीजै हनुमान लला की…
लंका सी कोट समुद्र सी खाई, जात पवनसुत बार न लाई । लंका जारि सिया-सुधि लाई, रामचन्द्र के काज संवारे ॥ आरती कीजै हनुमान लला की…
राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा । तुम्हरे भजन राम को पावै, जन्म-जन्म के दुख बिसरावै ॥ आरती कीजै हनुमान लला की…
अंत काल रघुबर पुर जाई, जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई । और देवता चित्त न धरई, हनुमत सेई सर्व सुख करई ॥ आरती कीजै हनुमान लला की…
संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा । जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥ आरती कीजै हनुमान लला की…
जो शत बार पाठ कर कोई, छूटहिं बंदि महा-सुख होई । जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥
॥ दोहा ॥ पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप । राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ॥
बोलो भक्तों – जय श्री राम! जय हनुमान! जय सीताराम! जय बजरंग बली! बजरंगबाण जो जपता, अजर-अमर वही बनता! बम-बम भोले, लाल लंगोटे वाले, जय जय हनुमान जी की! 🙏🪔🔥🏹🌟

