भारत नवंबर 2025 में एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के ताजा अनुमान के अनुसार भारत का नाममात्र जीडीपी 4.3 ट्रिलियन डॉलर को पार कर चुका है और अगले 18-24 महीनों में जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। यह सिर्फ आंकड़ा नहीं, पिछले 11 वर्षों की नीतिगत निरंतरता का परिणाम है।
2014 से 2025 तक का सफर देखें असाधारण रहे हैं। जब दुनिया कोविड-19 की मार झेल रही थी, तब भी भारत ने 2021-22 में 8.7% और 2022-23 में 7.2% की दर से विकास किया। 2024-25 की पहली छमाही में जीडीपी ग्रोथ 7.2% और दूसरी छमाही में 7.4% रहने का अनुमान है। रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 7.2% ग्रोथ का अनुमान रखा है। यह तब है जब वैश्विक विकास दर मात्र 3.2% रहने वाली है।
इस विकास के पीछे तीन बड़े इंजन हैं — इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल इकोनॉमी। 2024-25 में कैपिटल एक्सपेंडिचर 11.21 लाख करोड़ रुपये रहा जो जीडीपी का 3.4% है। गति शक्ति योजना के तहत 1.5 लाख किलोमीटर नए हाईवे, 100 नए एयरपोर्ट, 300 नए कार्गो टर्मिनल बन चुके हैं या निर्माणाधीन हैं।
मैन्युफैक्चरिंग में PLI स्कीम ने कमाल दिखाया है। मोबाइल फोन एक्सपोर्ट 2000% बढ़ा है। 2014 में भारत 6 मोबाइल फोन बनाता था, आज 97% मोबाइल फोन भारत में बनते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट 2025 में 120 बिलियन डॉलर को पार कर गया है। सेमीकंडक्टर मिशन के तहत ताइवान की Powerchip के साथ 11 बिलियन डॉलर का पहला प्लांट गुजरात में शुरू हो चुका है।
डिजिटल इकोनॉमी 2025 में 1 ट्रिलियन डॉलर की हो चुकी है। UPI ने 2025 अक्टूबर में 18.2 बिलियन ट्रांजेक्शन किए — यह पूरी दुनिया के कार्ड ट्रांजेक्शन से ज्यादा है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट नेटवर्क है। ONDC ने ई-कॉमर्स में क्रांति ला दी है — छोटे शहरों के दुकानदार अब सीधे ग्राहकों से जुड़ रहे हैं।
स्टार्टअप इकोसिस्टम में भारत तीसरे नंबर पर है। 1.25 लाख से ज्यादा स्टार्टअप, 110+ यूनिकॉर्न। 2025 में 25 नए यूनिकॉर्न बने हैं। फिनटेक, एग्रीटेक, हेल्थटेक, स्पेसटेक — हर क्षेत्र में भारतीय स्टार्टअप वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। बेरोजगारी अभी भी 7-8% के आसपास है, हालांकि यह 2017 के 6.1% से बेहतर है, पर युवाओं की अपेक्षाएं ज्यादा हैं। महंगाई 2025 में 4.5% के आसपास है जो RBI के टारगेट में है, पर खाद्य महंगाई अभी भी 7-8% पर चिंता का विषय है।
फिर भी तस्वीर बेहद सकारात्मक है। विदेशी मुद्रा भंडार 700 बिलियन डॉलर के पार, चालू खाता घाटा जीडीपी का सिर्फ 1.1%, फिस्कल डेफिसिट 4.9% से घटकर 2025-26 में 4.4% रहने का लक्ष्य — ये सारे संकेतक बताते हैं कि भारत अब सिर्फ तेजी से नहीं, स्थिरता के साथ भी बढ़ रहा है।
2027 तक 5 ट्रिलियन और 2047 तक विकसित भारत — यह अब सपना नहीं, नियोजित लक्ष्य है। और यह लक्ष्य अब असंभव नहीं लगता।

