भारत में स्वास्थ्य क्रांति 2025: आयुष्मान भारत से विश्व गुरु तक का सफर

नवंबर 2025 में भारत का स्वास्थ्य क्षेत्र अपने सुनहरे दौर में प्रवेश कर चुका है। पिछले 11 वर्षों में स्वास्थ्य बजट 200% से ज्यादा बढ़ा है — 2014 के 33,000 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में 92,000 करोड़ रुपये हो चुका है। लेकिन असली क्रांति आयुष्मान भारत योजना में हुई है। दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना अब 65 करोड़ लोगों को कवर कर रही है — यानी भारत की आधी से ज्यादा आबादी को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज।

2025 तक 1.8 करोड़ लोगों ने इस योजना से अस्पताल में मुफ्त इलाज करवाया है। पहले जहां गरीब परिवार कर्ज लेकर या संपत्ति बेचकर इलाज करवाते थे, अब 85% से ज्यादा केस में कैशलेस ट्रीटमेंट हो रहा है। हार्ट सर्जरी, कैंसर ट्रीटमेंट, किडनी ट्रांसप्लांट — सब कुछ कवर है। योजना में अब 1,900 से ज्यादा ट्रीटमेंट पैकेज हैं और 25,000 से ज्यादा अस्पताल empanelled हैं।

लेकिन सिर्फ बीमा नहीं, इंफ्रास्ट्रक्चर में भी क्रांति आई है। 2014 में देश में सिर्फ 7 AIIMS थे, आज 23 AIIMS कार्यरत हैं या अंतिम चरण में हैं। हर राज्य में मेडिकल कॉलेज खोलने का लक्ष्य लगभग पूरा हो चुका है — 2014 में 387 मेडिकल कॉलेज थे, आज 730 से ज्यादा हैं। MBBS सीटें 51,000 से बढ़कर 1,10,000 हो चुकी हैं। PG सीटें 31,000 से 70,000 से ऊपर।

कोविड-19 के समय भारत ने जो वैक्सीनेशन अभियान चलाया था, उसने दुनिया को हैरान कर दिया था। 220 करोड़ डोज लगाए गए — दुनिया में सबसे ज्यादा। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक है। Serum Institute अब सालाना 4 बिलियन डोज बना सकता है। 2025 में भारत ने मलेरिया वैक्सीन और सर्वाइकल कैंसर वैक्सीन भी लॉन्च कर दी है। दोनों स्वदेशी हैं।

प्रिवेंटिव हेल्थकेयर में भी बड़ा बदलाव आया है। 1.7 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर बन चुके हैं जो गांव-गांव में मुफ्त जांच और दवा दे रहे हैं। डायबिटीज, हाइपरटेंशन, कैंसर की स्क्रीनिंग अब रूटीन हो गई है। इसके परिणामस्वरूप non-communicable diseases से होने वाली मौतें 2018 के मुकाबले 22% कम हुई हैं।

महिलाओं के स्वास्थ्य में तो क्रांति ही आ गई है। मातृ मृत्यु दर 2014 के 130 प्रति लाख से घटकर 2025 में 77 रह गई है। शिशु मृत्यु दर 39 से 21 पर आ गई है। 2025 में पहली बार भारत ने WHO के सभी पैरामीटर पर 2030 के SDG लक्ष्यों को पहले ही हासिल कर लिया है।

मेंटल हेल्थ को भी प्राथमिकता मिली है। टेली-मानस सेवा अब 50,000 से ज्यादा कॉल रोजाना हैंडल कर रही है। हर जिले में मेंटल हेल्थ क्लिनिक खुल गए हैं।

स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भी अभूतपूर्व है। 2014 में 85% मेडिकल डिवेस इंपोर्ट होते थे, आज 78% भारत में बन रहे हैं। API और बुल्क ड्रग्स में भी 65% स्वदेशी उत्पादन। मेडटेक सेक्टर 2025 में 50 बिलियन डॉलर का हो चुका है।

2025 में भारत अब स्वास्थ्य पर्यटन में नंबर-1 बनने की राह पर है। थाईलैंड- सिंगापुर को पीछे छोड़ते हुए हर साल 10 लाख विदेशी मरीज भारत में इलाज करवा रहे हैं। केरल, तमिलनाडु, दिल्ली में वर्ल्ड क्लास अस्पताल बन चुके हैं।

आगे का लक्ष्य और बड़ा है — 2030 तक यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज, 2047 तक हर नागरिक को वर्ल्ड क्लास हेल्थ सुविधा। यह अब सपना नहीं, चल रहा मिशन है।

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