नवंबर 2025 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू हुए पूरे 5 वर्ष हो चुके हैं। और परिणाम साफ दिख रहे हैं।
सबसे बड़ा बदलाव — ड्रॉपआउट रेट। प्राथमिक स्तर पर यह 2018 के 14% से घटकर 2025 में 1.8% रह गया है। माध्यमिक स्तर पर 17% से घटकर 6.8%। इसका सबसे बड़ा कारण — 100% स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं (शौचालय, पीने का पानी, बिजली, इंटरनेट)।
दूसरा बड़ा बदलाव — मातृभाषा में शिक्षा। 26 राज्यों ने कक्षा 5 तक मातृभाषा में पढ़ाई अनिवार्य किया है। इसके परिणाम आश्चर्यजनक हैं। ASER 2025 रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण बच्चों की पढ़ने की क्षमता 2018 के 27% से बढ़कर 58% हो गई है।
तीसरा — स्किल शिक्षा। 2025 तक 92% स्कूलों में वोकेशनल कोर्स शुरू हो चुके हैं। ITI और पॉलिटेक्निक में 2.8 करोड़ युवा नामांकित हैं। कोडिंग, रोबोटिक्स, AI अब कक्षा 6 से पढ़ाया जा रहा है।
उच्च शिक्षा में क्रांति और बड़ी है। 2014 में भारत का एक भी विश्वविद्यालय टॉप 100 में नहीं था। QS रैंकिंग 2026 में IIT दिल्ली 44वें, IISc 56वें स्थान पर है। 8 भारतीय संस्थान टॉप 200 में हैं।
नए संस्थान भी बन रहे हैं। 7 नए IIT, 7 नए IIM, 15 नए AIIMS, 25 नए IIIT — पिछले 10 साल में जितने संस्थान 70 साल में नहीं बने थे।
सबसे खुशी की बात — विदेश में पढ़ने जाने वाले छात्रों की संख्या 2025 में पहली बार घटी है। 7.8 लाख से घटकर 6.2 लाख। कारण — भारतीय संस्थानों की गुणवत्ता बढ़ी है और फीस कम है।
शोध में भी उछाल आया है। भारत अब दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा शोध प्रकाशक देश है। पेटेंट फाइलिंग में चीन और अमेरिका के बाद तीसरा स्थान।
NEP का सबसे क्रांतिकारी प्रावधान — मल्टीपल एंट्री-एक्जिट और एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट — 2025 से पूरी तरह लागू हो चुका है। अब कोई छात्र बीच में कोर्स छोड़ भी दे तो उसके क्रेडिट सुरक्षित रहते हैं।
शिक्षा अब रोजगार से जुड़ गई है। 2025 में पहली बार ग्रेजुएट बेरोजगारी दर 12% से नीचे आई है।

