भारतीय राजनीति 2025: स्थिरता का नया अध्याय

नवंबर 2025 में भारतीय राजनीति अपने सबसे स्थिर दौर में से एक से गुजर रही है। NDA ने 2024 लोकसभा चुनाव में 293 सीटें जीतीं — 2014 के बाद यह तीसरी बार है जब कोई गठबंधन पूर्ण बहुमत के साथ लगातार तीसरी बार सत्ता में आया है। यह अपने आप में विश्व रिकॉर्ड है।

लेकिन इस स्थिरता के भीतर गजब का परिवर्तन हो रहा है। क्षेत्रीय दल कमजोर पड़ रहे हैं। सपा, टीएमसी, डीएमके, बीआरएस, जेडीयू — सबकी सीटें घटी हैं या स्थिर हैं, जबकि भाजपा ने उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक विस्तार किया है। ओडिशा में 20 लोकसभा + 75 विधानसभा सीटें, कर्नाटक में 17 से 25 लोकसभा सीटें, तेलंगाना में 4 से 8, पश्चिम बंगाल में 12 से 18 — यह विस्तार अभूतपूर्व है।

विपक्ष का संकट गहरा है। कांग्रेस 99 सीटों पर सिमट गई है। इंडिया गठबंधन टूट चुका है। राहुल गांधी ने 2025 जुलाई में पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। मल्लिकार्जुन खड़गे कार्यवाहक अध्यक्ष हैं। कांग्रेस अब सिर्फ 4 राज्यों (हिमाचल, कर्नाटक, तेलंगाना, झारखंड) में सत्ता में है या सहयोगी है।

राजनीति के केंद्र में अब विकास और सुशासन है। “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” अब सिर्फ नारा नहीं, हकीकत बन चुका है। 2025 में पहली बार मुस्लिम महिलाओं ने भी बड़े पैमाने पर भाजपा को वोट दिया है — तीन तलाक कानून, 33% आरक्षण बिल, और समान नागरिक संहिता की चर्चा ने इसका प्रभाव डाला है।

महिला प्रतिनिधित्व अभूतपूर्व स्तर पर है। 18वीं लोकसभा में 74 महिला सांसद, 2025 तक 9 राज्यों में महिला मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री। नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2029 से लागू होगा, पर कई पार्टियों ने पहले से ही 33% टिकट महिलाओं को देना शुरू कर दिया है।

राज्यसभा में भी बदलाव साफ है। भाजपा + सहयोगी दल अब 120+ सीटों के साथ बहुमत के करीब हैं। इससे संवैधानिक संशोधन आसान हो रहे हैं। समान नागरिक संहिता पर ड्राफ्ट तैयार है, 2026 में पेश होने की संभावना है।

युवा राजनीति में भी आ रहे हैं। 2025 में औसत सांसद की उम्र 55 वर्ष है — 2014 के 59 से काफी कम। 40 से कम उम्र के 60+ सांसद हैं। तेजस्वी यादव, अखिलेश, केसीआर के बेटे — सब हाशिए पर हैं। नई पीढ़ी में शुभकरण चौहान, बांसुरी स्वराज, करण भूषण सिंह जैसे नाम उभरे हैं।

राजनीति अब कम polarised और ज्यादा performance-oriented हो गई है। जो राज्य अच्छा काम कर रहे हैं, उन्हें केंद्र से ज्यादा फंड मिल रहा है। यह स्वस्थ फेडरलिज्म का नया मॉडल है।

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